K Kamaraj Birth Anniversary: आजाद भारत के पहले किंगमेकर थे के कामराज, तीन बार बने तमिलनाडु के सीएम

By अनन्या मिश्रा | Jul 16, 2025

आज ही के दिन यानी की 15 जुलाई को कुमारस्वामी कामराज का जन्म हुआ था। उनको आजादी के बाद कांग्रेस के सबसे ताकतवर अध्यक्ष के तौर पर भी जाना जाता है। वहीं पं. नेहरू के निधन के बाद के कामराज कांग्रेस में अधिक ताकतवर हो गए थे। हालांकि बाद में उनसे इंदिरा गांधी ने टक्कर ली थी। हालांकि जब साल 1966 में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं, तो उसमें सबसे बड़ी भूमिका के कामराज की थी। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर के कामराज के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म और परिवार

तमिलनाडु के विरदुनगर में 15 जुलाई 1903 को के कामराज का जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम कामाक्षी कुमारस्वामी नाडेर था। हालांकि बाद में वह कामराज के नाम से जाने गए थे। वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे। वहीं के कामराज 15 साल की उम्र में जलियावाला बाग हत्याकांड के कारण स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े। फिर महज 16 साल की उम्र में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। जब के कामराज 18 साल के थे, तब गांधी जी ने असहयोग आंदोलन की शुरूआत की थी।

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के कामराज भी इस आंदोलन में शामिल हुए और साल 1930 में के कामराज ने नमक आंदोलन में हिस्सा लिया और इस दौरान वह पहली बार जेल गए। इसके बाद वह 6 बार जेल गए। के कामराज ने करीब 3,000 दिन जेल में बिताए थे। जेल में रहने के दौरान के कामराज ने अपनी पढ़ाई पूरी की और इसी दौरान वह म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के चेयरमैन चुने गए। लेकिन जेल से आने के करीब 9 महीने बद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।


तमिलनाडु के सीएम

के कामराज को दक्षिण भारत की राजनीति में शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए जाना जाता है। देश की आजादी के बाद 13 अप्रैल 1954 में के कामराज अनिच्छा से तमिलनाडु के सीएम बनें। इससे राज्य को एक ऐसा नेता मिला, जो क्रांतिकारी कदम उठाने वाला था। के कामराज तीन बार तमिलनाडु के सीएम बनें। 


किंगमेकर बने के कामराज

बता दें कि के कामराज को आजाद भारत के पहले किंगमेकर के रूप में भी जाना जाता है। कामराज को दो बार पीएम बनने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने यह पद नहीं लिया। फिर पं. नेहरू की मौत के बाद साल 1964 में कांग्रेस नेतृत्व के संकट का सामना कर रही थी। ऐसे में बतौर कांग्रेस अध्यक्ष उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री को पीएम पद की कुर्सी तक पहुंचाया।


लेकिन शास्त्री की मौत के बाद एक बार फिर जब पीएम की कुर्सी खाली हुई, तब भी के कामराज के पास प्रधानमंत्री बनने का मौका था। लेकिन उन्होंने फिर से इस पद को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। 


इंदिरा गांधी से बढ़ने लगे थे मतभेद

कांग्रेस के भीतर कामराज और उनके सहयोगियों को 'सिंडिकेट' के नाम से जाना जाता था। जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं, तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी में कामराज की पकड़ कमजोर करने का काम शुरू किया। दरअसल, सिंडिकेट पार्टी चलाता था और इंदिरा सरकार चला रही थीं। पार्टी और सरकार के बीच इतने मतभेद हो गए कि साल 1969 में औपचारिक रूप से पार्टी का विभाजन हो गया।


साल 1967 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कई राज्यों में हार मिली। लोकसभा में पार्टी को 258 सीटें मिलीं। वहीं के कामराज भी गृह विधानसभा विरदुनगर से हार गए। इस बार इंदिरा गांधी ने कहा कि हारे हुए नेताओं को पद छोड़ना होगा। ऐसे में के कामराज ने भी कांग्रेस अध्यक्ष पद को छोड़ दिया। इस बार नए कांग्रेस अध्यक्ष निजा लिंगाप्पा बने, लेकिन संगठन के फैसले के कामराज ही ले रहे थे। लेकिन ऐसा लंबे समय तक नहीं चला और संगठन व सरकार के बीच दूरी बढ़ती गई।


मृत्यु

वहीं 02 अक्तूबर 1975 को गांधी जयंती के दिन 72 साल की उम्र में के कामराज की हार्ट अटैक से मौत हो गई। साल 1976 में के कामराज को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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