Navratri पर कामाख्या मंदिर का बना रहे हैं Plan? Guwahati पहुंचने से दर्शन तक, जानें Complete Guide

By दिव्यांशी भदौरिया | Mar 22, 2026

नीलांचल पहाड़ियों पर स्थित है मां कामाख्या देवी का मंदिर। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम की राजधानी गुवाहटी में देवी मां कामाख्या का अद्भुत धार्मिक स्थल है, जो अध्यात्म और तंत्र विद्या का भी बड़ा केंद्र है। यह मंदिर देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें और यहां कैसे पहुंच सकते हैं, आपको बताते हैं।

इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ है। कामाख्या देवी मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां माता की कोई मूर्ति नहीं। मंदिर के गर्भगृह में एक प्राकृतिक जलधारा के बीच योनि के आकार का एक शिलाखंड है, जिसे माता का स्वरुप मानकर पूजा जाता है। मंदिर के गुबंदों पर की गई नक्काशी और पत्थरों पर उकेरी हुई आकृतियां इस मंदिर को भारत के सबसे अद्भुत और खूबसूरत मंदिरों में से एक बनाती है।

देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने भगवान शिव के विरह-वियोग को समाप्त करने के लिए माता सती के देह को अपने सुदर्शन चक्र से खंडित किया, तब उनके अंग पृथ्वी पर 51 विभिन्न स्थानों पर गिर गए। कहा जाता है कि नीलांचल पर्वत पर माता सती का योनि भाग गिरा था, इसलिए यह स्थल स्त्री शक्ति और सृजन का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।

तंत्र साधना का केंद्र

कामाख्या शक्ति पीठ को तंत्र विद्या का गढ़ माना जाता है। यहां अघोरी, साधु और तांत्रिक अपनी सिद्धियों के लिए आते हैं। माना जाता है कि यहां पर की गई पूजा से शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

दस महाविद्याओं के भी करें दर्शन

मां कामाख्या के मंदिर के साथ ही यहां पर दस महाविद्याओं के मंदिर भी है। त्रिपुर सुंदरी, काली, तारा, भुवनेश्वरी, बग्लामुखी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धुमावती, मातंगी और कमला दस महाविद्याएं हैं। इसके साथ ही यहां पर महादेव के भी पांच मंदिर स्थित है।

कामाख्या देवी मंदिर कैसे पहुंचें? 

- हवाई मार्ग- हवाई मार्ग से पहुंचने के लिए सबसे निकटतम एयरपोर्ट लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो मंदिर से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां उतरने के बाद आप आसानी से टैक्सी या बस के माध्यम से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

- रेल मार्ग- रेल मार्ग से आने पर कामाख्या जंक्शन सबसे नजदीकी स्टेशन है, हालांकि गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से अधिक सुविधाजनक और बेहतर कनेक्शन मिलता है। वहां से मंदिर तक पहुंचने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा और बस जैसी परिवहन सेवाएं आसानी से मिल जाती हैं।

- सड़क मार्ग- गुवाहाटी शहर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप निजी वाहन या सरकारी बसों के जरिए सीधे मंदिर परिसर तक जा सकते हैं। 

दर्शन के लिए कुछ जरूरी टिप्स

- मंदिर के कपाट सुबह 8 बजे से लेकर सूर्यास्त तक खुले रहते है। दोपहर के समय माता के विश्राम के लिए पट बंद किए जाते हैं।

 - खास त्योहारों के दौरान दर्शन करने के लिए कम से कम 5-10 घंटे तक का समय लग सकता है,  इसलिए वीआईपी पास या जल्दी पहुंचने की सलाह दी जाती है।

- मंदिर में पारंपरिक और सभ्य कपड़े पहनकर जाएं। 

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