कामिका एकादशी व्रत से होती हैं भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी

By प्रज्ञा पाण्डेय | Jul 27, 2019

सावन महीने में पड़ने वाली पहली एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी बहुत खास होती है क्योंकि यह भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर उनकी इच्छाएं पूरी करती है। तो आइए हम आपको इस पावन कामिका एकादशी के बारे में बताते हैं।

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पद्म पुराण में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ है। इस व्रत को करने के बाद किसी तरह के पूजा की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही कामिका एकादशी का व्रत करने से वाजपेयी यज्ञ के समान फल मिलता है। कामिका एकादशी का व्रत करने से जीवन के सभी दुखों का नाश हो जाता है और उन्हें सुख मिलते हैं। इस लाभकारी व्रत की तिथि, पूजा का मुहुर्त, अर्चना की विधि के बारे में नीचे दिया गया है।

एकादशी शुरू होगी- 27 जुलाई 2019 को शाम 7 बजकर 43 से

एकादशी खत्म होगी- 28 जुलाई 2019 को शाम 6 बजकर 49 मिनट तक

पारण का समय- 29 जुलाई 2019 को सुबह 5 बजकर 40 मिनट से 8 बजकर 23 मिनट तक

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कामिका एकादशी पर ये महाउपाय करने से मिलेगा मनचाहा वरदान-

1. 5 सफेद जनेऊ को केसर से रंगे और 5 पीले फल लें।

2. कामिका एकादशी के दिन हलके पीले रंग के कपड़े पहने।

3. तुलसी की माला से पीले आसन पर बैठकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।

4. प्रसाद के रूप में एक केला घर पर ले आएं और परिवार को भी दें।

5. जाप के बाद पांचों जनेऊ और पीले फल भगवान विष्णु के मंदिर में अर्पण करें।

बरतें ये सावधानियां-

1. घर में प्याज, लहसुन का इस्तेमाल बिल्कुल भी ना करें।

2. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाकर साफ कपड़े पहने।

3. एकादशी की पूजा में परिवार में शांति पूर्ण माहौल बनाए रखें।

4. कामिका एकादशी पर एक आसन पर बैठकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का 108 बार जाप जरूर करें।

5. सुबह और शाम एकादशी की पूजा में साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही व्रत कथा सुने।

विष्णु जी की पूजा से घर में आती हैं खुशियां

1. दशमी की रात से ही व्रत का संकल्प लें।

2. दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद केवल फल खाएं।

3. दशमी की रात में विष्णु जी का जाप करें जैसे  ॐ नमो नारायणाय.....।

4. धूप-दीप जलाएं और कलश रखें।

5. भगवान विष्णु को फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग आदि अर्पण करें और पीले आसन पर बैठ जाएं।

6. अपने दाएं हाथ में जल लेकर घर में धन धान्य के लिए भगवान विष्णु के सामने संकल्प लें।

7. पूरा दिन निराहार रहकर शाम को कामिका एकादशी की व्रत सुनकर फलाहार करें।

8. शाम के समय भगवान विष्णु के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाएं।

9. सुबह ब्राह्मणों को भोजन कराकर तथा दक्षिणा देने के बाद भोजन करें।

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एकादशी को करें विशेष अर्चना

सूर्य को करें अर्पित जल

एकादशी को विष्णुजी के साथ सूर्य भगवान की पूजा जरूर करें। एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और नहाने के बाद तांबे के लोटे से सूर्य देवता को जल चढ़ाएं। जल अर्पण के समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।

शिवलिंग पर चढ़ाएं जनेऊ

एकादशी के दिन शिवजी की खास अर्चना करें। पूजा में बेलपत्र, चंदन, धतूरा, चावल, फूल और अन्य पूजा सामग्री के साथ ही जनेऊ भी अवश्य चढ़ाएं। शिवलिंग के सामने बैठकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। सूर्यास्त के बाद शिव मंदिर जाएं और शिवलिंग के पास दीया जलाएं।

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भगवान विष्णु को चढ़ाएं पीले कपड़े

विष्णु को पीला वस्त्र चढ़ाएं। विष्णुजी के साथ ही लक्ष्मी जी की भी पूजा करें। सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं। इस दिन अनाज और धन का दान करें। पक्षियों के लिए दाना-पानी भी दें।

कामिका एकादशी का महत्व

कामिका एकादशी को पापों की मुक्ति दिलाने वाली एकादशी कहा जाता है। कामिका एकादशी की पूजा से सभी देवता, गंधर्व और सूर्य की पूजा का फल मिल जाता है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के आराध्य भगवान शिव है और भगवान शिव के आराध्य भगवान विष्णु है। इसी वजह से कामिका एकादशी का व्रत करने से भगवान शिव और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिल जाता है। यह व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सभी सुख मिलते हैं।

- प्रज्ञा पाण्डेय

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