By अंकित सिंह | Jul 19, 2024
उत्तर प्रदेश में कांवड़ मार्ग पर खाने-पीने की दुकानों पर 'नेमप्लेट' लगाने और मलिकों का नाम लिखाने के आदेश को लेकर सियासत जारी है। योगी सरकार के ये आदेश भाजपा के सहयोगियों को भी रास नहीं आ रहा है। नीतीश कुमार की जदयू पहले ही सवाल खड़ी कर चुकी है, अब जयंत चौधरी की रालोद ने भी सवाल खड़े किए हैं। योगी सरकार के आदेश पर रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा कि गांधी जी, चौधरी चरण सिंह और अन्य महानुभावों ने धर्म और जाति को पीछे रखने की बात कही है। अब नेता राजनीति में धर्म और जाति को आगे बढ़ा रहे हैं।
जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि इससे भी बड़ी (यूपी में) कांवड़ यात्रा बिहार में होती है। वहां ऐसा कोई आदेश प्रभावी नहीं है। लगाए गए ये प्रतिबंध 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' का उल्लंघन है, जिसकी बात प्रधानमंत्री करते हैं। उन्होंने कहा कि यह आदेश बिहार, राजस्थान, झारखंड में प्रभावी नहीं है। इसकी समीक्षा हो तो अच्छा रहेगा। बीजेपी नेता मोहसिन रजा ने कहा कि यूपी में कांवड़ यात्रा बड़े पैमाने पर होती है। सीएम योगी आदित्यनाथ जनता की सुरक्षा के प्रति हमेशा सजग रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि पिछले 7 वर्षों से कांवर यात्रा की सुविधाओं और प्रबंधन को हमेशा बेहतर किया गया है। 8वां साल है... सरकार सुविधाएं और सुरक्षा दे रही है। इसलिए किसी को भी अपना नाम छुपाने की जरूरत नहीं है। यह सौहार्द का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस एडवाइजरी का नहीं बल्कि कांवड़ यात्रा का विरोध करना चाह रहा है।