By एकता | Aug 30, 2026
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन के बाद भारत में नई सियासी बहस शुरू हो गई है। भाजपा के कई नेता जहां उनके भाषण की तारीफ कर रहे हैं और समर्थन में खड़े हैं, वहीं कांग्रेस ने भागवत की टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भागवत के ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर निशाना साधा है।
सिब्बल ने कहा कि जब मोहन भागवत न्यूयॉर्क में भारत के लोगों के एक-दूसरे के प्रति संवेदना और एकता की बात कर रहे थे, तो उन्हें राहुल गांधी के बयानों की याद आ गई। उन्होंने मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब भारत में ऐसी घटनाएं होती हैं, तब क्या लोगों के प्रति वही संवेदना दिखाई जाती है, जिसकी बात विदेश में की जा रही है?
कपिल सिब्बल ने राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिंदू और राम भक्त होने पर गर्व किया जा सकता है, लेकिन जो लोग विविधता के सम्मान की बात करते हैं, उन्हें मंदिर निर्माण से पहले हुई घटनाओं पर भी बोलना चाहिए।
सिब्बल ने मोहन भागवत के भाषण में इस्तेमाल किए गए चार शब्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भागवत ने विविधता का जश्न मनाने, सम्मान करने, स्वीकार करने और संरक्षण की बात कही। इसके बाद सिब्बल ने सवाल किया कि भारत में जब विविधता कथित तौर पर खतरे में होती है, तब आरएसएस प्रमुख ने कितनी बार इसके खिलाफ आवाज उठाई?
कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि मोहन भागवत ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं, जो उनके मुताबिक विविधता को स्वीकार, सम्मान और संरक्षित नहीं करती। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क में एक अलग दर्शक वर्ग के सामने अलग संदेश दिया जा रहा है। इसी को लेकर उन्होंने भागवत के विदेश में दिए गए भाषण और भारत की राजनीति में उनके रुख के बीच अंतर पर सवाल उठाए।