कसौली की प्राकृतिक छटा को देखकर अभिभूत हो जाते हैं पर्यटक

By प्रीटी | Apr 26, 2018

चंडीगढ़ से शिमला जाने वाली सड़क की आधी दूरी पर स्थित है, खूबसूरत हिल स्टेशन−कसौली। कालका से करीब 20 किमी ऊपर पहाड़ी की ओर सड़क पर मोड़ है और यहीं इस मोड़ के दूसरी ओर से आता पहाड़ की पहली हवा का झोंका यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। प्रकृति की अनुपम छटा को देखकर पर्यटक अभिभूत हो जाता है। यह मधुर हवा का झोंका कहीं ओर से नहीं बल्कि पर्वतीय स्थल कसौली की तरफ से आ रहा होता है।

बस के अलावा इस 'ट्वाय ट्रेन' से धरमपुर तक जाया जा सकता है जोकि कसौली का सबसे ही नजदीकी रेलवे स्टेशन है। फिर यहां से किसी भी बस द्वारा कसौली पहुंचा जा सकता है और जो पर्यटक पैदल जाना चाहते हैं वे सड़क मार्ग से करीब तीन घंटे में कालका से कसौली पहुंच सकते हैं। वैसे पैदल जाने का अपना ही मजा है। पूरे रास्ते में चीड़ के पेड़ों की कतार है और पक्षियों का कलरव आपका मन बहलाता रहता है।

कसौली समुद्र तल से 1927 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जो शिमला से मात्र 280 मीटर कम है। अतः यहां की जलवायु शिमला जैसी ही है। परंतु यहां शिमला जैसा बड़ा बाजार, भीड़−भाड़, दुकानदारों की लूट और महंगाई नहीं है। जो लोग रोज की भागदौड़ की जिंदगी से ऊबकर कुछ दिन आराम करना चाहते हैं, उनके लिए कसौली एक आदर्श जगह है। यहां संगठित क्रियाकलाप का पूर्णतया अभाव है। इसलिए ऐसा लगता है मानो समय ठहर गया हो। शांति ही यहां की खासियत है। कुछ दिनों तक दुख−दर्द और तकलीफ को भुलाकर केवल आराम करने के लिए इससे अच्छी जगह नहीं हो सकती।

कसौली की दो प्रमुख सड़कें हैं− अपर माल और लोअर माल। इन सड़कों के दोनों किनारों पर चीड़, ओक और देवदार के वृक्षों से घिरे मकान हैं। पुराने फैशन के ये हवादार मकान या तो सेना के अधिकारियों के हैं या फिर लम्बे समय से रह रहे वहां के निवासियों के। इस क्षेत्र में वाहन के आने का समय निर्धारित है जिसके कारण अन्य समय में पर्यटक स्वच्छंद रूप से वादियों का लुत्फ उठाते रहते हैं।

कसौली से रात में शिमला की छटा देखते ही बनती है। असंख्य टिमटिमाती बत्तियों से दीप्तिमान यह शहर रात में किसी परीलोक से कम नहीं लगता। इससे थोड़ा नीचे सबातू और उसके दायीं ओर दंगराई तथा सनावर में टिमटिमाती बत्तियां जुगनुओं की उपस्थिति का भ्रम पैदा कर देती हैं। इसके दक्षिण में स्थित चंडीगढ़ तथा अंबाला की विस्तृत बिजलियां भी दिखती हैं। खुले और साफ मौसम में इन दृश्यों को दिन में भी देखा जा सकता है। यहां पर एक छोटा सा बाजार भी है जो सड़क की ढलान पर स्थित है।

प्रत्येक वर्ष, अक्टूबर माह के प्रथम चार दिनों में कसौली में मेले जैसी हलचल नजर आती है क्योंकि इस समय सनावर में स्कूल का स्थापना दिवस मनाया जाता है। यहां बच्चों के माता−पिता कोने−कोने से आते हैं। मानसून के दिनों में वर्षा की बौछार पड़ते ही कसौली की हरियाली और भी बढ़ जाती है। बारिश थमी नहीं कि कुहासे का साम्राज्य हो जाता है और पर्यटक उसमें घूमने निकल पड़ते हैं। रास्ते में जगह−जगह भुट्टे पकाने वाले भुट्टे बेचते हुए मिलते हैं जिनको पर्यटक बड़े ही चाव से खाते हैं।

कसौली में सबसे ऊंची जगह है, मंकी प्वाइंट। यहां से प्रकृति की दूर−दूर तक फैली अनुपम छटा दिखाई पड़ती है। मंकी प्वाइंट तथा दूसरी ओर गिलनर्ट पहाड़ी पर लोग सुबह−शाम टहलने निकलते हैं। इन दोनों जगहों पर पिकनिक मनाने वालों की हमेशा भीड़ लगी रहती है। कसौली की अच्छी आबोहवा के चलते यहां पर क्षय रोगियों के लिए सेनटोरियम बनाया गया है।

यहां एक चर्च है जिसमें पुराने जमाने के विभिन्न प्रकार के बूंदीदार रंगीन ग्लास वाले दरवाजे तथा खिड़कियां लगी हुई हैं, जो देखते ही बनती हैं। कसौली क्लब तथा प्राइवेट होटलों के अलावा हिमाचल पर्यटक विभाग ने भी यहां एक होटल बनवाया है जहां पर्यटकों की भीड़ हमेशा लोगों का ध्यान आकृष्ट किये रहती है। सर्दियों के मौसम में होटल के बाहर भी लंच परोसा जाता है जिसे लोग वादियों का नजारा लेते हुए आपस में हिलमिलकर बड़े चाव से खाते हैं।

-प्रीटी

प्रमुख खबरें

UP मंत्री Yogendra Upadhyay के बयान से बवाल, Johny Johny पर छिड़ी Culture की बड़ी बहस

Diesel का क्रेज खत्म? SUV Market में अब भी बादशाहत, लेकिन BS-7 Norms से बढ़ेगी चुनौती

भारत में Fuel Crisis का खतरा! 10 साल के निचले स्तर पर तेल भंडार, Pakistan समेत कई एशियाई देश संकट में

Tamil Nadu में टूटा दशकों पुराना Protocol, CM Vijay की शपथ में बजावंदे मातरम, CPI हुई नाराज