Kashmir Police कर रही मस्जिदों और इमामों का डाटाबेस तैयार, LG प्रशासन पर भड़के MP AGA Syed Ruhullah Mehdi

By नीरज कुमार दुबे | Jan 14, 2026

पिछले वर्ष ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने मस्जिदों, मदरसों और उनसे जुड़े धार्मिक संस्थानों की विस्तृत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य कट्टरपंथी नेटवर्क पर लगाम कसना है, जबकि राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने इसे संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और निजता के अधिकार पर हमला बताया है।

इसे भी पढ़ें: 'मनमाने ढंग से नौकरी से निकाल रहे', Jammu Kashmir में 5 कर्मचारियों पर एक्शन से Mehbooba Mufti नाराज

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस अभियान का एक उद्देश्य मस्जिदों, मदरसों और उनसे जुड़े लोगों का एक व्यापक डाटाबेस तैयार करना है। उन्होंने कहा, “नवंबर में जिस ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था, उसकी जांच में सामने आया कि कुछ संदिग्धों को मदरसों या सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी बनाया गया था। मौलवी इरफान जैसे कुछ इमामों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।” प्रपत्र में यह जानकारी भी मांगी गई है कि संबंधित मस्जिद या मदरसा किस मुस्लिम पंथ—बरेलवी, देवबंदी, हनफी या अहले हदीस—का पालन करता है। अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर में व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली सूफी परंपरा को नकारने वाले इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव को भी घाटी के युवाओं में कट्टरता बढ़ने का एक कारण माना जा रहा है।

इमामों, शिक्षकों और प्रबंधन समिति के सदस्यों से यह भी पूछा गया है कि क्या वे पहले कभी आतंकी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, साथ ही उनसे किसी लंबित मामले या अदालत से हुई सजा का विवरण भी देने को कहा गया है। हम आपको याद दिला दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस की मदद से पिछले साल नवंबर के पहले सप्ताह में एक ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में तीन चिकित्सकों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक की बरामदगी हुई थी। यह मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ा था और कश्मीर, हरियाणा व उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।

दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि पहले से ही सीआईडी, आईबी और अन्य एजेंसियों की निगरानी मौजूद है, ऐसे में धार्मिक संस्थानों पर अतिरिक्त जानकारी संग्रह “धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन” है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मस्जिदों पर नियंत्रण की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। आगा रुहुल्लाह मेहदी ने मेहदी ने कहा, "उनके (पुलिस के) पास आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के रूप में पहले से ही जानकारी मौजूद है। यह जानकारी इकट्ठा करना धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले एक विशेष धर्म के लोगों के एक विशिष्ट वर्ग को डराने-धमकाने का प्रयास है।" सांसद ने कहा, "ऐसा लगता है कि इमामों को भाजपा द्वारा अनुमोदित या शायद आरएसएस द्वारा भेजे गए उपदेश देने के लिए कहा जाएगा।"

इसी तरह, मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाली मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने इस कवायद पर “गहरी चिंता” जताते हुए इसे निजता, गरिमा और मौलिक अधिकारों का पूर्ण उल्लंघन बताया है। संगठन ने उपराज्यपाल प्रशासन से इस प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने और धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता का सम्मान करने की मांग की है।

देखा जाये तो कश्मीर में सुरक्षा कारणों से उठाया गया यह कदम अब एक व्यापक बहस का रूप ले चुका है, जहां एक ओर प्रशासन इसे कट्टरपंथ के खिलाफ जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रमुख खबरें

BCCI का Mission 2027! Ajit Agarkar को मिली नई Team India को गढ़ने की बड़ी जिम्मेदारी

Neeraj Chopra, Sumit Antil का Mental Harassment का आरोप, द्रोणाचार्य अवार्डी Coach नवल सिंह बर्खास्त

Chelsea का संकट गहराया: लगातार चौथी हार के बाद Top 5 से बाहर होने का खतरा, Manchester United मजबूत

ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI में बड़ी हलचल, भारतीय मूल के CTO ने छोड़ा अपना पद।