By नीरज कुमार दुबे | Oct 22, 2026
श्रीनगर में बुधवार को दुर्गोत्सव के समापन पर बंगाली समुदाय ने भव्य शोभायात्रा निकालकर मां दुर्गा को विदाई दी। ऐतिहासिक लाल चौक और घंटाघर के पास से निकली इस शोभायात्रा में पुरुषों और महिलाओं ने ढोल की पारंपरिक थाप पर नृत्य किया। इसके बाद शोभायात्रा अमीरा कदल घाट पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार, आरती और पारंपरिक विदाई गीतों के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा का झेलम नदी में विसर्जन किया गया। इस दौरान मुस्लिम समुदाय की अजान के सम्मान में शोभायात्रा कुछ मिनट के लिए रोक दी गई। यह दृश्य कश्मीर की साझा सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक सहिष्णुता का संदेश देता नजर आया।
इसे भी पढ़ें: Jammu-Kashmir से हर तरह के आतंकवाद का जल्द ही पूरी तरह होगा सफाया, IGP Tejinder Singh ने कर दिया बड़ा ऐलान
हम आपको याद दिला दें कि आतंकवाद, असुरक्षा और कश्मीरी पंडितों के बड़े पैमाने पर पलायन ने घाटी की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को गहरा नुकसान पहुंचाया था। कई मंदिरों को क्षति पहुंची और अनेक धार्मिक आयोजनों का सार्वजनिक स्वरूप कमजोर पड़ गया था। ऐसे में अब विभिन्न अवसरों पर हिंदू समुदाय के लोगों का एकत्र होना और पारंपरिक उत्सवों का आयोजन करना घाटी की सांस्कृतिक विविधता को फिर से सामने लाने वाला घटनाक्रम है।
कश्मीर में मंदिरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के प्रयास भी इस व्यापक परिदृश्य का हिस्सा हैं। आतंकवाद के दौर में क्षतिग्रस्त हुए मंदिरों के जीर्णोद्धार से स्थानीय हिंदू समुदाय को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला है। इस बदलाव की झलक बाजारों में भी दिखाई देती है। दुर्गोत्सव, नवरात्र, दीपावली और अन्य हिंदू त्योहारों के दौरान पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, सजावटी सामान, दीयों और मिठाइयों की मांग बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों को कारोबार के अतिरिक्त अवसर मिल रहे हैं। उम्मीद की जा सकती है कि सुरक्षा, आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द का वातावरण मजबूत होने के साथ कश्मीर में विभिन्न समुदायों के त्योहारों की रौनक और बढ़ेगी।