Modi के Mission Apple से कश्मीर के लोगों को हुआ कितना फायदा ?

By नीरज कुमार दुबे | Dec 06, 2019

देश ही नहीं दुनिया भर में अपने सेब की मिठास के लिए मशहूर कश्मीर में लगभग 18 लाख टन सेब की पैदावार होती है और अगर भारत में सेब की कुल पैदावार के मुकाबले अकेले कश्मीर में सेब की पैदावार को देखें तो यह पूरे देश की कुल पैदावार का 75 प्रतिशत बैठता है। इस बार तो कश्मीर घाटी में सेब की बंपर पैदावार हुई है और पिछले वर्ष की तुलना में यह 10 फीसदी ज्यादा है। जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर्यटन के अलावा सेब भी है। पिछले तीन दशकों में कश्मीर ने आतंकवाद का दंश झेला इसके बावजूद यहाँ बागवानी उद्योग ने लगातार प्रगति की और यह प्रगति पूरी तरह सेब की बदौलत ही हुई। सेब का व्यापार कश्मीर को सालाना 1200 करोड़ रुपये की आय कराता है। हालाँकि इस वर्ष 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में जो हालात बने उससे सेब उत्पादकों की आय पर असर तो पड़ा ही साथ ही मौसम की मार ने भी सेब कारोबार पर बुरा असर डाला है।

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इस मिशन के तहत केंद्र सरकार ने किसानों से सीधे सेब खरीदने का काम नैफेड को सौंप दिया और सेब उत्पादकों को पैसे सीधे उनके खाते में मिलने लगे। नैफेड ने सेबों की किस्मों की ग्रेडिंग तय कर उसकी कीमत तय करने का काम शुरू किया। बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत नैफेड ने उत्पादकों को उचित कीमत देकर अब तक 8500 मीट्रिक टन से ज्यादा सेब खरीद लिया है। हालांकि बताया जा रहा है कि अभी भी 50 प्रतिशत सेब की फसल बागानों में मौजूद है और इसकी भी जल्द ही खरीद की जायेगी। सरकार का कहना है कि सेब उत्पादक इस योजना का लाभ 15 फरवरी, 2020 तक उठा सकते हैं। फिलहाल तो बर्फबारी से परेशान सेब उत्पादक सरकार से और मदद की आस लगाये बैठे हैं।

-नीरज कुमार दुबे

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