By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 18, 2026
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के नेता केसी त्यागी ने शुक्रवार को कहा कि असहमति देशद्रोह नहीं है और हर लोकतंत्रवादी तथा गांधीवादी को उस परंपरा को तोड़ने का प्रयास करना चाहिए, जिसमें नेता, पार्टी और देश का पर्याय बन जाता है। पत्रकार जयशंकर गुप्त की पुस्तक ‘आपातकाल से अमृतकाल’ के विमोचन कार्यक्रम में पूर्व सांसद त्यागी ने कहा कि आज दिख रही ‘बीमारियों’ और ‘खराब लक्षणों’ की शुरुआत 2014 के बाद नहीं हुई, बल्कि इनके बीज 1960 और 1970 के दशकों में विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को बर्खास्त किए जाने के दौरान ही बो दिए गए थे। उन्होंने कहा कि 1969 के बाद शुरू हुई राजनीतिक परंपराओं और परिस्थितियों का असर आज भी दिख सकता है।
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहन प्रकाश ने कहा कि असहमति स्वीकार नहीं करने से समाज को जिस दिशा में ले जाया जा रहा है, उससे बड़ा नुकसान होगा। हाल के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए प्रकाश ने कहा कि आज की पीढ़ी जुल्म का प्रतिकार करने के बजाय उसे बर्दाश्त कर रही है और पुलिसकर्मियों को फूल दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास आंदोलनों से निपटने के दो विकल्प थे—राजनीतिक वार्ता या पुलिस कार्रवाई, लेकिन उसने दूसरा विकल्प चुना।