By संतोष उत्सुक | Dec 11, 2024
अन्नू मेहनती बच्ची है। वह सभी काम लगन से करती। मम्मी कई बार उसे घर पर अकेला छोड़ जाती तो वह पेंटिंग या स्केचिंग करती रहती। सामान्य ज्ञान की पुस्तक पढ़ती। उसके भैया शेखू, स्कूल से बाद में आते तब दोनों मिलकर स्कूल का होमवर्क कर लेते। उनकी मम्मी स्कूल में अध्यापिका थी। वह लौटती तो दोनों बच्चों को शाबासी देती। अन्नू चहकते हुए बताती कि आज उसने पेंटिंग की।
कुछ दिन पहले स्कूल के नोटिस बोर्ड पर नोटिस लगाया गया कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर, ‘इंटर स्कूल क्विज़ प्रतियोगिता’ का आयोजन किया जा रहा है। अन्नू की क्लास टीचर ने उसे कहा कि क्विज़ में हिस्सा लेकर पुरस्कार जीतने के लिए अच्छे से तैयारी कर लेना। उसने अपनी मम्मी को बताया कि उनके स्कूल में क्विज़ प्रतियोगिता हो रही है जिसमें दूसरे स्कूलों के विद्यार्थी भी हिस्सा ले रहे हैं। मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र में नई स्थापित निजी कंपनी के बड़े अधिकारी आने वाले हैं। प्रतियोगिता में जीतने वाले सभी बच्चों को पुरस्कार व प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
अन्नू की मम्मी ने भी उसे प्रेरित करते हुए कहा कि वह मन लगाकर तैयारी करे ताकि उसका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहे। अगर कोई किताब बाज़ार से लानी है तो ज़रूर लाए। स्कूल में सभी विद्यार्थी अध्यापकों, अभिभावकों व सहपाठियों से मदद ले लेते थे। अन्नू को विश्वास रहा कि वह पुरस्कार अवश्य जीतेगी। उसे भरपूर आत्म विश्वास था कि क्विज़ में आने वाले संभावित सवालों के सही जवाब उसे आते हैं। उसे अलग से कोई किताब पढ़ने की ज़रूरत नहीं है न ही किसी से पूछने की। उसके पापा ने भी उसे कहा कि यदि कुछ पूछना हो, किसी विषय के सवाल या जवाब के बारे संदेह हो तो अपने अध्यापक, पापा मम्मी या दोस्तों से ज़रूर पूछ लेना चाहिए।
अन्नू ने अपने पापा से कहा कि वह स्वयं कर लेगी। प्रतियोगिता हुई लेकिन ज्यादा आत्मविश्वास के कारण और जल्दी करने की वजह से कुछ जवाब गलत हो गए। कुछ जवाबों पर संदेह रहा और कुछ सवाल छूट भी गए। अन्नू खुद अपनी परफॉरमेंस से संतुष्ट नहीं रही। नतीजन, उसे सिर्फ प्रमाण पत्र मिला। पढ़ाई में उससे कमजोर बच्चों ने भी प्रतियोगिता में पुरस्कार जीत लिए। उसे समझते देर नहीं लगी कि कहां गलती हुई है। उसके झूठे अति आत्म विशवास ने ही उसे हरा दिया।
घर आकर उसकी मम्मी ने अभी पूछा भी नहीं था कि अन्नू ने स्वयं बताया, “मम्मी मुझे गलत लगता था कि मुझे सब पता है, मैं बहुत अच्छा परफॉर्म करूंगी। अपने स्कूल से बाहर के विद्यार्थियों के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर पता चलता है कि हमें कितना आता है। ज्ञान का स्तर बढाते रहने के लिए लगातार मेहनत करना ज़रूरी है”।
उसकी मम्मी ने समझाया, “निपुणता के लिए नियमित अभ्यास करना ज़रूरी है। उस अभ्यास को ही मेहनत कहते हैं बेटा”।
अन्नू को समझ आ गया था कि अब उसे क्या करना है।
- संतोष उत्सुक