अब इस सीट से चुनाव लड़ेंगे केजरीवाल? दिल्ली हार के बाद पंजाब की पॉलिटिक्स में ऐसे होगा 'प्रवेश'

By अभिनय आकाश | Feb 10, 2025

तो इस तलाश का अंजाम भी वहीं निकला,

मैं देवता जिसे समझा था आदमी निकला

2013, 2015, 2020 के चुनाव ने कहा था कि केजरीवाल पार्टी और नेता नहीं आईडिया थ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, पढ़ा लिखा नेता, इंडियन रिवेन्यू सर्विस का पूर्व अवसर, आईआईटी का स्टूडेंट, गुड गवर्नेंस। लेकिन नतीजे जो बयां करते हैं उसे आप ऊपर लिखे हासन कमाल के लिखे शेर के मर्म से समझ सकते हैं। भगवान राम का वनवास 14 साल का था राम के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा की दिल्ली में वनवास की मियाद 27 साल बाद खत्म हुई है। छह चुनाव के शिकस्तों और 27 साल के सुख को क्रॉस कर बीजेपी दिल्ली की सत्ता में लौट गई। आम आदमी पार्टी गमगीन है। 10 सालों में खड़ा किया गया अभेद्य लगने वाला किला ध्वस्त हो गया। सत्ता की अभ्यस्त आम आदमी पार्टी पहली बार दिल्ली में विपक्ष में बैठेगी। ऐसा विपक्ष जिसकी विधानसभा में ना तो अरविंद केजरीवाल होंगे ना मनीष सिसोदिया ना सत्येंद्र जैन और ना ही सौरभ भारद्वाज। कांग्रेस कंफ्यूज है। हार का दर्द है मगर एक सुकून है कि भले ही वह हार गई, मगर 2013 से जिसने उसे जख्म पर जख्म दिए उसे कम से कम कुछ घाव तो दे ही दिए। 

दिल्ली चुनाव परिणाम के बाद उपजे सवाल

बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री कौन होगा? आलाकमान से झटपट मुलाकात कर आने वाले जाइंट किलर प्रवेश वर्मा या कोई अप्रत्याशित नाम। अब आम आदमी पार्टी के हाथों से दिल्ली की सत्ता फिसल चुकी है तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह अरविंद केजरीवाल और टीम की सियासत का अंत है? दिल्ली के परिणाम आम आदमी पार्टी की सेहत पर अल्पकालीन और दीर्घकालिक क्या असर डालेंगे। दिल्ली के बाद अब पंजाब का क्या होगा? क्या पंजाब में भगवंत मन की सरकार खतरे में है। कांग्रेस को पटखनी देकर आम आदमी पार्टी ने बड़ी दर्ज की थी लेकिन क्या इस पावर टसल में केजरीवाल के हाथों से पंजाब भी निकल जाएगा। दिल्ली चुनाव के नतीजे का पंजाब की राजनीति पर क्या असर होगा? क्या अरविंद केजरीवाल अब लुधियाना सीट से चुनाव लड़ेंगे?

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पंजाब की राह पकड़ेंगे केजरीवाल

जाहिर सी बात है कि दिल्ली में हार के बाद पंजाब में इस सवाल का जवाब तलाश जाना शुरू हो चुका है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कांग्रेस नेता और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि दिल्ली में हार के बाद अरविंद केजरीवाल पंजाब जाएंगे, जहां वो राज्य का मुख्यमंत्री बनने की कोशिश करेंगे। बाजवा ने पंजाब में आप के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा के बयान का जिक्र किया है, जिसमें अरोड़ा ने कहा था कि पंजाब में एक हिंदू भी सीएम बन सकता है। वैसे तो ये बयान दिल्ली चुनाव से पहले दिया गया था। लेकिन इसे केजरीवाल के पंजाब की राजनीति में प्रवेश के तौर पर देखा जा रहा है।

खाली है पंजाब की ये सीट

दिलचस्प बात यह है कि लुधियाना पश्चिम की विधानसभा सीट खाली है। कांग्रेस नेता बाजवा का कहना है कि अरविंद केजरीवाल के लिए आसान है कि वो लुधियाना से चुनाव लड़ सकते हैं। आप की पंजाब इकाई में आंतरिक खींचतान होगी। बाजवा ने कहा कि मान और उनके समर्थकों को सत्ता संघर्ष में आप के दिल्ली नेतृत्व के खिलाफ खड़ा किया जाएगा। पंजाब में आप विधायकों के बीच बड़े पैमाने पर दलबदल हो सकता है।

पंजाब में होगा मध्यावधि चुनाव?

दूसरी ओर, गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने दिल्ली में करारी हार के बाद आप के बिखरने के साथ पंजाब में मध्यावधि चुनाव की भविष्यवाणी की। पंजाब को मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहना चाहिए। पंजाब में बिखर जाएगा आप के विधायकों का झुंड! उनकी पार्टी के कम से कम 35 विधायक जहाज छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल होने के लिए तैयार बैठे हैं। दिल्ली के नतीजे उस बड़े भ्रष्टाचार को भी सामने लाएंगे जो आप ने दिल्ली शराब घोटाले की तर्ज पर पंजाब में शराब घोटाले और इस साल धान खरीद में एमएसपी घोटाले के रूप में किया है। अब सब कुछ खुलकर सामने आ जाएगा।

मोदी से पंजाब को आप-दा मुक्त करने का बेड़ा उठाने की मांग

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की शानदार जीत के बाद पार्टी की पंजाब इकाई के नेताओं ने कहा कि अब पंजाब के लोगों की बारी है कि वे अगले विधानसभा चुनाव में पाखंडियों को राज्य से बाहर फेंक दें। पंजाब के नेताओं ने आम आदमी पार्टी (आप) पर निशाना साधते हुए दावा किया कि वहां के लोग भगवंत मान सरकार से तंग आ चुके हैं। पंजाब बीजेपी के चीफ सुनील जाखड़ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में दिल्ली को आप-दा मुक्त करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जी समेत भाजपा के सभी कार्यकर्ता को बधाई। जिनकी मेहनत से दिल्ली में 27 साल बाद कमल खिला है। अब पंजाब को आप-दा मुक्त करने का बीड़ा भी प्रधान मंत्री जी को उठाना होगा। पंजाबियों की नजर अब मोदी जी पर है, कब उनके नेतृत्व में पंजाब में मौजूद भय का माहौल खत्म होगा और लोग अमन शांति से रह पाएंगे। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के लिए दिल्ली की जनता को बधाई दी। उन्होंने लिखा कि अब पंजाब की बारी है। पंजाब के लोगों ने मन बना लिया है। अब पाखंडियों की बारी है। मतलब साफ है कि बीजेपी से लेकर कांग्रेस के नेताओं तक ने आप को घेरना शुरू कर दिया है।

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असली सीएम के आने पर बदल जाएगी मान की कुर्सी?

लेकिन सवाल यह है कि इन दावों में सच में कोई दम है या यह सिर्फ हवा हवाई बातें हैं। इसे समझने के लिए पंजाब में आपकी राजनीति पर बारीकी से नजर डालना जरूरी है। फरवरी 2017 में भगवंत मन को पंजाब में आप का संयोजक बनाया गया। 2017 के विधानसभा चुनाव में आप को 20 सीटों पर जीत मिली। 2019 में मान को फिर से यह जिम्मेदारी दी गई। विधानसभा चुनाव में आपकी जीत के बाद भगवंत मन को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया गया। 12 अप्रैल 2022 की बात है। पंजाब के ब्यूरोक्रेट्स के साथ अरविंद केजरीवाल एक मीटिंग कर रहे होते हैं लेकिन इस मीटिंग में सीएम भगवंत मान की मौजूदगी नहीं होती है। अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंजाब के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी, बिजली सचिव दलीप कुमार, पीएसपीसीएल के अध्यक्ष बलदेव सिंह सरन, राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा और दिल्ली के तत्कालीनस्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन की मौजूदगी होती है। तब विपक्षी पार्टियों ने भगवंत मान को एक रबर स्टैंप बताया था जो अरविंद केजरीवाल के इशारे पर चलते हैं। ठीक 2 महीने बाद जून 2022 को संगरूर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के प्रचार का दिन। केजरीवाल, सिसोदिया समेत आप के बड़े नेताओं ने अपने उम्मीदवार के समर्थन में रोड शो किया। एक रोड शो के दौरान केजरीवाल खुद तो कार के अंदर खड़े दिखते हैं लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान इसी गाड़ी की खिड़की पर लटके हुए होते हैं। जिन्हें गिरने से बचाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड ने भी पीछे से सहारा दिया हुआ होता है। तब कांग्रेस पार्टी ने मान को केजरीवाल का बॉडीगार्ड करार दिया था। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या पंजाब के असली मुख्यमंत्री के आने पर भगवंत मान जी ने कुर्सी बदल ली। 

बहरहाल, आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल अब तक कभी भी विपक्ष में नहीं रहे हैं। ऐसे में इस बार सत्ता हाथ से जाने के बाद कहा जा रहा है कि क्या पंजाब में भी दिल्ली वाला मॉडल देखने को मिल सकता है। यानी सीएम की कुर्सी पर भगवंत मान जरूर बैठे देखे लेकिन असल में सारी शक्तियां केजरीवाल के हाथों में ही होंगी।

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