By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 14, 2026
केरलम विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के सदस्यों के बीच राज्य में जारी बिजली संकट को लेकर बुधवार को तीखी बहस हुई। राज्य में बिजली कटौती के मुद्दे पर चर्चा के लिए सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करने की मांग करते हुए जीआर अनिल समेत एलडीएफ विधायकों ने एक नोटिस पेश किया था, जिसके बाद दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने इस नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
नोटिस को स्वीकार न किए जाने से नाराज एलडीएफ सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में विधानसभा से बहिर्गमन किया। विजयन ने सदन से बहिर्गमन के दौरान दिए गए भाषण में मौजूदा बिजली संकट और बिजली कटौती के लिए सरकार की “अक्षमता और कुप्रबंधन” को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरा दोष पिछली एलडीएफ सरकार पर मढ़ने की कोशिश कर रही है।
विजयन ने दावा किया कि बिजली संकट उन नव-उदारवादी नीतियों का नतीजा था, जिन्हें कांग्रेस ने केंद्र में सत्ता में रहने के दौरान शुरू किया था और जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी जारी रखा, जो अब केएसईबी का निजीकरण करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि केरलम में यूडीएफ भी इसी नीति का पालन कर रही है। विजयन ने दावा किया कि ओमन चांडी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से किए गए लंबे समय के बिजली खरीद समझौते को नियामक आयोग ने प्रक्रिया संबंधी अनियमितताओं के कारण रद्द कर दिया था।
उन्होंने कहा कि देश अपनी जरूरत से दोगुनी बिजली पैदा करता है, लेकिन इसके बावजूद बिजली का संकट है, क्योंकि उत्पादन का 60 प्रतिशत हिस्सा अंबानी, अडाणी और टाटा जैसी निजी कंपनियों के हाथों में है।