By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 14, 2026
‘बुकिंग डॉट कॉम’ के बुधवार को जारी एक सर्वेक्षण के अनुसार, यात्री ज़्यादा बेहतर और यादगार छुट्टियों के लिए होमस्टे, वेकेशन रेंटल और अपार्टमेंट जैसे विकल्पों को अपना रहे हैं। सर्वेक्षण में शामिल 85 प्रतिशत लोग असली स्थानीय अनुभव के लिए होमस्टे, वेकेशन रेंटल और अपार्टमेंट जैसे विकल्पों को पसंद करते हैं और 87 प्रतिशत का मानना है कि इनसे ज्यादा यादगार अनुभव मिलते हैं। डिजिटल ट्रैवल मंच ‘बुकिंग डॉट कॉम’ के ‘भारत 2026 में कैसे यात्रा करता है - घरों पर एक नजर’ रिपोर्ट का हिस्सा यह सर्वेक्षण ऐसे आवास की बढ़ती पसंद को उजागर करता है जो यात्रियों को पारंपरिक होटलों से परे स्थानीय संस्कृति, भोजन और गंतव्यों का अनुभव करने का अवसर देता है।
नीति आयोग की 2025 की ‘होमस्टे रिपोर्ट’ के अनुसार, भारत में अनुमानित रूप से दो लाख से ज़्यादा होटल कमरों की कमी है। इससे वैकल्पिक रहने की सुविधा देने वालों के लिए ऐसे स्थानों पर क्षमता बढ़ाने के मौके बन रहे हैं जहां कमरों की कमी है, और साथ ही बड़े कार्यक्रमों के दौरान अचानक बढ़ने वाली मांग को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है। सर्वे में कारोबार के लिए यात्रा करने वालों की बदलती पसंद पर भी रोशनी डाली गई है; वे काम से जुड़ी यात्राओं के लिए अब रहने की दूसरी जगहों पर भी विचार कर रहे हैं।
लगभग 41 प्रतिशत कारोबारी यात्रियों ने ऐसे स्थानों को चुनने की मुख्य वजह के तौर पर ज्यादा जगह और अलग शयनकक्ष या काम करने की जगह का जिक्र किया, जबकि 40 प्रतिशत लोगों ने इन्हें इसलिए पसंद किया क्योंकि यहां उनके साथ आए परिवार के सदस्यों या साथियों के रहने की भी सुविधा थी। वहीं, 39 प्रतिशत लोगों ने असली और स्थानीय अनुभवों को मुख्य आकर्षण माना, जबकि 37 प्रतिशत ने लंबे समय तक ठहरने पर मिलने वाले बेहतर मूल्य का जिक्र किया। ‘बुकिंग डॉट कॉम’ के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय प्रमुख, संतोष कुमार ने कहा, “रहने की वैकल्पिक जगहों का कुल मिलाकर बढ़ना भारत की ‘ट्रैवल इकॉनमी’ में एक बड़ा बदलाव है।
हम एक बुनियादी बदलाव देख रहे हैं, जिसमें रहने की वैकल्पिक जगहें अब सिर्फ एक अतिरिक्त विकल्प नहीं रह गये हैं, बल्कि यह गैर मेट्रो बाजारों और क्षेत्रीय केंद्रों में पर्यटन के विस्तार को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।” यह सर्वेक्षण जून 2026 में ऑनलाइन प्रश्नावली के जरिए किया गया था, जिसमें 2,359 उपभोक्ता शामिल थे; इनमें से 87 प्रतिशत भारत में रहने वाले थे और 13 प्रतिशत अनिवासी भारतीय या विदेशी पर्यटक थे।