By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 15, 2026
केरलम के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने बृहस्पतिवार को राज्य विधानसभा में कहा कि राज्य केंद्र की पीएम-श्री योजना से एकतरफा तरीके से बाहर नहीं हो सकता, क्योंकि पिछली एलडीएफ सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन में इससे बाहर निकलने का कोई प्रावधान नहीं है। शमसुद्दीन ने कहा कि राज्य सरकार पीएम-श्री योजना के संबंध में आगे की कार्रवाई पर फैसला उप-समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही करेगी। शमसुद्दीन ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि समझौता ज्ञापन में यह उल्लेख है कि इसके प्रावधानों में किसी भी संशोधन या बदलाव के लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी होगी।
इसकी रिपोर्ट को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है और रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद आगे के फैसले लिए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार के सामने मुश्किल स्थिति है, क्योंकि पिछली एलडीएफ सरकार ने ‘प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया’ (पीएम-श्री) योजना लागू करने पर सहमति जताई थी और अक्टूबर 2025 में इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे। शमसुद्दीन ने राज्य के इस रुख को दोहराया कि केरलम के सरकारी स्कूलों में राज्य द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अलावा कोई अन्य पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जा सकता।
मंत्री ने कहा कि सरकार इस बात पर अपने विकल्पों पर विचार कर रही है कि समग्र शिक्षा केरल (एसएसके) समेत केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्य को मिलने वाली रोकी गई धनराशि के मामले में उच्चतम न्यायालय या किसी अन्य उपयुक्त अदालत का रुख किया जाए या नहीं। विपक्षी सदस्यों के कानूनी कार्रवाई शुरू करने के सुझावों पर उन्होंने कहा कि सरकार अभी इस मामले पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में आगे क्या करना चाहिए और क्या रुख अपनाना चाहिए, हम फिलहाल इसी पर विचार कर रहे हैं।
आप यहां सुझाव दे रहे हैं और हमें मुकदमा दायर करने के लिए कह रहे हैं। हम इस पर विचार करेंगे।’’ तमिलनाडु की कानूनी चुनौती का जिक्र करते हुए शमसुद्दीन ने विपक्ष के इस सुझाव पर सवाल उठाया कि केरलम को भी अदालत का रुख करना चाहिए। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पहले ही बता चुकी है कि एसएसके और अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्य को मिलने वाली धनराशि केरलम के बच्चों का अधिकार है और इसे पीएम-श्री योजना से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘एसएसके और अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि इस राज्य के बच्चों का अधिकार है। इसलिए, संघीय व्यवस्था के तहत यह हमारा अधिकार है और हमें यह धनराशि मिलनी ही चाहिए।’’ विधानसभा में पूछे गए सवाल में पंजाब का भी जिक्र किया गया, जिसने अक्टूबर 2022 में पीएम-श्री योजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे और 241 विद्यालयों का चयन किया था। पंजाब ने जुलाई 2023 में योजना से हटने का फैसला किया था, लेकिन 26 जुलाई 2024 को इसे फिर से लागू करने का निर्णय लिया।
विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में अब 419 विद्यालयों में यह योजना लागू की जा रही है। सदस्यों ने यह भी कहा कि तमिलनाडु को छोड़कर सभी राज्यों ने योजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब और अन्य राज्यों में हुए बदलावों को देखते हुए केरलम भी अपने रुख पर फिर से विचार कर सकता है।
पीएम-श्री योजना के तहत 14,500 विद्यालयों को उन्नत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 18 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना का उद्देश्य इन विद्यालयों को आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित करना और उनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 की भावना को समाहित करना है।