By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 06, 2026
कोट्टायम (केरलम), छह नवंबर निर्माण ठेकेदार विजयकुमार अपने एक कुशल कारीगर की वापसी का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का रहने वाला यह कारीगर दुर्गा पूजा मनाने अपने घर गया था, लेकिन अभी तक उसकी वापसी अनिश्चित बनी हुई है। इस अनिश्चितता का मुख्य कारण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की वह अपील है, जिसमें उन्होंने श्रमिकों से (राज्य से)वापस न जाने का आग्रह किया है।
उन्होंने वीबी-जी राम जी योजना के तहत आजीविका के अवसरों का हवाला दिया है, जो 125 दिनों के काम की गारंटी देती है और श्रमिकों को अपने परिवार के साथ रहते हुए आजीविका कमाने में सक्षम बनाती है। इस जिले के वेलियन्नूर गांव के रहने वाले वेलियन्नूर के अनुसार, उनका यह कर्मचारी वर्षों से केरलम के निर्माण क्षेत्र में काम कर रहा है। वह कुछ हफ़्ते पहले दुर्गा पूजा मनाने अपने पैतृक गांव गया था।
वह पारंपरिक केरलम शैली में घर बनाने का विशेषज्ञ है। पश्चिम बंगाल सरकार की इस घोषणा ने केरलम में चिंता पैदा कर दी है, जो कई क्षेत्रों—विशेषकर निर्माण क्षेत्र—में प्रवासी मजदूरों पर अत्यधिक निर्भर है, जहां जारी परियोजनाओं के लिए उनकी सेवाएं महत्वपूर्ण हैं। विजयकुमार के अनुसार, राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल से आने वाले श्रमिकों की संख्या में पहले ही कमी आ चुकी थी, और यह गिरावट विशेष रूप से हिंदू मदजूरों में देखी गई थी।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ऐसे प्रवासी मजदूर हैं जो वर्षों से पश्चिम बंगाल से केरलम आ रहे हैं। लेकिन अब कई लोग विभिन्न कारणों से अपने गृह राज्य में ही काम जारी रखने का फैसला कर रहे हैं। उन्होंने कहा, इस स्थिति में, पश्चिम बंगाल सरकार की नवीनतम घोषणा से केरलम में उनके प्रवास पर और अधिक असर पड़ने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि एक समय पश्चिम बंगाल के मजदूर केरलम के निर्माण क्षेत्र में बहुसंख्यक थे। हालांकि, अब झारखंड, ओडिशा और असम सहित अन्य राज्यों के मजदूरों की हिस्सेदारी अधिक है। विजयकुमार ने दावा किया कि यदि पश्चिम बंगाल सरकार की घोषणा प्रवासी मजदूरों के एक बड़े हिस्से को अपने गृह राज्य में रुकने के लिए राजी करने में सफल हो जाती है, तो केरलम का निर्माण क्षेत्र इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।
वहीं, क्रेडाई केरल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सेतुनाथ एम. का मानना है कि मजदूरों का अपने गृह राज्य में लौटना केवल एक अस्थायी घटना होगी। क्रेडाई केरल भारत के रियल एस्टेट डेवलपर संघों के परिसंघ का राज्य निकाय है, जो राज्य में निजी बिल्डरों और रियल एस्टेट कारोबारियों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि केरलम देश में निर्माण श्रमिकों के लिए सबसे अधिक मजदूरी देने वाले राज्यों में से एक है, जहां औसत दिहाड़ी लगभग 900 रुपये है।
उन्होंने कहा कि इतनी अधिक मजदूरी को देखते हुए, मजदूरों द्वारा अपनी कमाई से समझौता करने और स्थायी रूप से अपने गृह राज्यों में लौटने की संभावना बहुत कम है। सेतुनाथ ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, इसलिए, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की घोषणा का केरलम पर कोई दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। मजदूर इस तरह की घोषणा के आधार पर तुरंत काम छोड़कर नहीं जाने वाले।
अगर उनमें से कुछ लौट भी जाते हैं, तो यह केवल एक अस्थायी स्थिति होगी। उन्होंने बताया कि केरलम का बेहतर जीवनस्तर, भोजन, सामाजिक स्वीकृति, उच्च मजदूरी और निश्चित आराम व छुट्टी की सुविधा ऐसे कारक हैं जिन्हें नजरअंदाज करना प्रवासी मजदूरों के लिए मुश्किल होगा।