By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 10, 2026
केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वायनाड भूस्खलन में मारे गए लोगों के परिवारों और इस घटना में घायल हुए लोगों को समय पर अनुग्रह राशि दी जाए। न्यायमूर्ति ए. के. जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति प्रीता ए. के. की पीठ ने इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए सरकार से यह रिपोर्ट भी मांगी कि निर्माण स्थल पर काम कब रोका गया था और अगर वहां सारी गतिविधियां रोक दी गई थीं तो भी श्रमिक वहां क्यों मौजूद थे।
उच्च न्यायालय की पीठ ने देय अनुग्रह राशि के शीघ्र वितरण के अलावा सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि शवों को बिना किसी देरी के संबंधित परिवारों को सौंप दिया जाए। अदालत ने कहा कि अनुग्रह राशि और घायलों के उपचार का खर्च फिलहाल सुरंग परियोजना के खाते से लिया जा सकता है और वह बाद में तय करेगी कि यह राशि किससे वसूल की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि इलाके में कीचड़ और दलदल होने के कारण खोजी कुत्ते शवों को नहीं ढूंढ पा रहे हैं, इसलिए लापता लोगों की तलाश के लिए मानव श्रम का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि 25 मई के आदेश के अनुपालन के तहत बाहरी कार्यों को छोड़कर, अन्य सभी गतिविधियों को स्थल पर रोक दिया गया था। इसके बाद, पांच जुलाई को स्थल पर सभी काम रोकने का आदेश दिया गया था।
इस पर अदालत ने सवाल किया कि फिर श्रमिक कार्यस्थल पर क्या कर रहे थे? अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तक सरकार से इस पर जवाब मांगा है। शुक्रवार को आपदा स्थल से एक और शव बरामद होने के बाद इस भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। यह भूस्खलन सात जुलाई को अनाक्कोम्पोयिल मेप्पाडी सुरंग परियोजना के स्थल पर हुआ था, जिसका उद्देश्य वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ना है।