By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 20, 2026
केरल विश्वविद्यालय छात्र आचार संहिता नियमावली के मसौदे में प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर विरोध बढ़ गया है। मसौदे में परिसर और संबद्ध कॉलेजों में राजनीतिक गतिविधियों को सीमित करने का प्रस्ताव है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नियमों को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और न ही इन्हें लागू किया गया है। वाम-समर्थक ‘केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन’ के सदस्यों के अनुसार, विश्वविद्यालय सिंडिकेट ने हाल में इन मसौदा नियमों पर विचार किया।
उन्होंने कहा कि हिंसक गतिविधियों में शामिल छात्रों को एक साल के निलंबन का सामना करना पड़ सकता है। प्रस्तावित दंड में छात्रों पर 5,000 रुपये, राजनीतिक संगठनों पर 10,000 रुपये और बार-बार उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना शामिल है। बकाया जुर्माने को देय राशि माना जाएगा और इसके कारण राजस्व वसूली तथा संभावित रूप से संपत्ति कुर्क की जा सकती है।
साथ ही, परीक्षा के नतीजे रोके जा सकते हैं और ‘भारतीय न्याय संहिता’ व ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम’ के तहत आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। ‘केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन’ ने इन प्रस्तावित नियमों का विरोध किया है। उनका कहना है कि ये नियम परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश हैं और अलोकतांत्रिक हैं।
यूनियन ने कहा है कि अगर ये नियम लागू किए गए तो वे प्रदर्शन करेंगे। उनका आरोप है कि ऐसी पाबंदियों से संगठनात्मक गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी कम हो जाएगी। केरल विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार रेशमी आर ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अभी सिर्फ एक मसौदा तैयार किया गया है और इसे अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।