जानिए, भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रहे सरकारी दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही तय करने का आह्वान क्यों किया?

By कमलेश पांडे | Aug 03, 2026

भारत द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK/PoJK) में कथित सरकारी दमन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही की अपील केवल एक मानवीय बयान नहीं, बल्कि एक बहु-स्तरीय कूटनीतिक रणनीति भी मानी जा रही है। हाल के दिनों में भारत ने पाकिस्तान से क्षेत्र में नागरिकों के साथ हुए कथित दमन पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। 

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भारत की यह अपील वहां के हालात के मद्देनजर बिल्कुल सही वक्त पर उठाया हुआ उचित कदम है। इससे वहां के आंदोलनकारियों को कूटनीतिक ऑक्सीजन मिली है। यदि बलूच विद्रोहियों का उन्हें साथ मिल जाये तो सोने पर सुहागा समझिए। भारत की सहानुभूति दोनों पक्षों से है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक मर्यादा के चलते भारत खुलकर इनका साथ नहीं दे सकता है, जबकि मानवता और लोकतंत्र के नाम पर वह पाकिस्तानी हुक्मरानों को घेर सकता है। इसलिए भारत ने वही किया है, जो सबके लिए उचित है।

वैश्विक दुनियादारी के नकाबपोशों के नकाब उतारने के लिए भारत ने अंतर्राष्ट्रीय विरादरी से साफ कहा है कि पाकिस्तानी सरकार की कार्रवाई में PoK में 40 नागरिकों की मौत हुई है, जबकि वहां लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि यह मामला वहां हो रहे चुनावों से जुड़ा है। पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 45 सीटों के लिए असेंबली इलेक्शन हो रहे हैं। ये चुनाव तीन चरणों में कराए जा रहे हैं, जो 10 अगस्त को पूरे होंगे। यहां विधानसभा की 53 सीटें हैं। इनमें से 45 पर सीधा चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रैट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं। 

इसी चुनाव में हुई जबरदस्त धांधली के बाद पीओके की जनता भड़क गई है। गत 27 जुलाई को पहले चरण का चुनाव हुआ, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) ने 13 में से 9 सीटें जीतीं, बाकी 4 सीटें पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को मिलीं। इस चरण में जबरदस्त धांधली हुई। यह बात भी किसी से छिपी हुई नहीं है कि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र की हमेशा से ही उपेक्षा की है। लिहाजा वहां प्रदर्शन हो रहे हैं। दरअसल, ये प्रदर्शन उन 12 सीटों को लेकर हो रहे हैं, जो प्रवासियों के लिए आरक्षित हैं। 

इसकी अगुआई जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) नाम का सिविल सोसाइटी ग्रुप कर रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) का कहना है कि इस्लामाबाद सरकार इन सीटों पर धांधली कर अपने लोग बिठाती है ताकि पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) असेंबली पर उसका कंट्रोल बना रहे। इस आरोप में दम है क्योंकि जो पार्टी पाकिस्तान पर हुकूमत करती है, वही अक्सर पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) चुनाव जीतती है। ,चूंकि पिछले दो महीने से पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में जबरदस्त आर्थिक परेशानी बढ़ी। इसलिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लोगों के गुस्से बढ़े हुए हैं।

वास्तव में, इसकी वजहें सिर्फ चुनावी धांधली ही नहीं हैं, बल्कि आर्थिक दुश्वारियों की वजह से भी उनका गुस्सा परवान चढ़ा हुआ है। चूंकि स्थानीय लोगों के अधिकार और भी सीमित किए जा रहे हैं, इसलिए भी लोग बौखलाए हुए हैं। खबरें तो ये भी हैं कि सरकारी बंदिशों की वजह से ही इलाके में लोगों को सब्सिडाइज्ड गेहूं और जरूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। वहीं, बिजली कटौती को लेकर भी लोगों में गुस्सा है। 

पाक अधिकृत कश्मीर की नदियों पर बने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जो बिजली बनती है, वह यहां के लिए जरूरी 400 मेगावॉट से कहीं अधिक है। इसके बावजूद इलाके में 15-20 घंटों तक बिजली काटी जाती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत दखल देकर पाकिस्तान सरकार के दमन पर रोक लगानी चाहिए।

# भारत के इस कदम के प्रमुख कूटनीतिक मायने इस प्रकार हैं:-

पहला, नैरेटिव का पलटवार: पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। भारत अब PoK में मानवाधिकार और शासन के प्रश्नों को प्रमुखता देकर यह संदेश दे रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्र की स्थिति पर भी जाना चाहिए। 

दूसरा, मानवाधिकार आधारित कूटनीति: भारत अपनी बात को केवल क्षेत्रीय दावे तक सीमित न रखकर मानवाधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे से जोड़ रहा है। इससे उसकी अपील व्यापक अंतरराष्ट्रीय विमर्श में अधिक स्वीकार्य बनाने का प्रयास दिखता है। 

तीसरा, पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव: यदि प्रमुख देश, संयुक्त राष्ट्र या मानवाधिकार संस्थाएं इस मुद्दे पर अधिक सक्रिय होती हैं, तो पाकिस्तान पर राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय कदम की संभावना कई देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी।

चौथा, PoK के लोगों के प्रति संदेश: भारत यह संकेत भी देता है कि वह PoK के निवासियों के अधिकारों और उनकी स्थिति पर सार्वजनिक रूप से आवाज उठा रहा है। इससे वहां के घटनाक्रम को लेकर भारत की आधिकारिक रुचि प्रदर्शित होती है।

पांचवां, द्विपक्षीय से वैश्विक विमर्श की ओर: यह रुख दर्शाता है कि भारत केवल भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय संदर्भ में नहीं, बल्कि वैश्विक मानवाधिकार और जवाबदेही के मानकों के आधार पर भी इस विषय को प्रस्तुत करना चाहता है।

हालांकि, इस रणनीति की सीमाएं भी हैं। कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर अधिकांश देश संतुलित रुख अपनाते हैं और दोनों पक्षों से संयम की अपेक्षा करते हैं। इसलिए भारत की अपील से तत्काल कोई अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई होना निश्चित नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव और वैश्विक चर्चा अवश्य बढ़ सकती है। 

सुलगता सवाल है कि आखिर इस मसले पर दुनिया दखल क्यों दे, क्योंकि यह तो पहले ब्रिटिश और अब अमेरिकी शासकों द्वारा रचा गया और प्रोत्साहित किया गया खेल है, ताकि एशियाई देश परस्पर संघर्षरत रहें और अमेरिकी-यूरोपीय दाल यहां गलती रहे। पहले सोवियत संघ और अब रूस-चीन से अमेरिकी-यूरोपीय देशों को जो संयुक्त चुनौती मिल रही है, उसके दृष्टिगत भारत जैसे तटस्थ देश की नहीं, बल्कि पाकिस्तान जैसे दोगले देश की जरूरत अमेरिका को है, जो चीन के साथ मिलकर रूस/भारत के खिलाफ भी उसे भड़काता रहता है, क्योंकि यही अमेरिकी-यूरोपीय एजेंडा है। 

खासबात यह है कि भारत भले ही खुद को गुटनिरपेक्ष बताए, लेकिन अमेरिका-यूरोपीय देश उसे रूस का वफादार मित्र तथा चीन का चिर शत्रु समझते हैं। शायद इसी चीनी शत्रुता को भड़काकर वो अपना मकसद भी साधना चाहते हैं। लेकिन यहां भी भारत सधी चाल चलकर सबको हैरत में डाल देता है। इसलिए अब भारत को पीओके के बहाने घेरने की दुनियावी चाल चली गई है, जिसका अमेरिका-चीनी कुचक्र से गहरा नाता है। इस समस्या का समाधान अनुनय विनय से नहीं बल्कि शौर्य प्रदर्शन से किया जाना ही श्रेयस्कर होगा, ताकि पाकिस्तान-बंगलादेश से विदेशी खूंटों को उखाड़ फेंका जा सके।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

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