शतरंज का शीतयुद्ध: KGB एजेंट सिक्योरिटी के लिए तैनात, चैलेंजर को हिप्नोटाइज करने की कोशिश, शतरंज के इतिहास का सबसे विवादस्पद मुकाबला

By अभिनय आकाश | Jun 03, 2025

सेना की इंफेंट्री पार करने के लिए धीरे धीरे आगे बढ़ती है। उनके हाथी पहले ही रक्षात्मक रेखा को तोड़ चुके हैं। राजा पीछे हटने की कोशिश करता है। लेकिन शत्रु की घुड़सवार सेना उसे पीछे से घेर लेती है। अब तो बच निकलना असंभव है। परंतु हम किसी वास्विक युद्ध के दृश्य का वृतांत आपको नहीं सुना रहे। न ही ये कोई वीडियो गेम की बात कर रहे हैं। अपने करीब डेढ़ सदी के अस्तित्व में शतरंज को युद्ध कौशल का उपकरण, मानवीय प्रसंगों के लिए एक रूपक और प्रतिभा के बेंचमार्क के रूप में जाना जाता है। भारत में स्पोटर्स का मतलब एक ही खेल है और वो है क्रिकेटर। कुछ सालों पहले तक आप इस बात को सच मान सकते थे। लेकिन आज चेस की वजह से स्थिति बदल चुकी है। विश्वनाथन आनंद जैसे महान भारतीय खिलाड़ियों ने इसे काफी लोकप्रिय बना दिया है। अब शतरंज की चर्चा नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट में विश्व चैंपियन डी गुकेश की जीत के बाद और ज्यादा होने लगी है। लेकिन एक देश ऐसा भी है जिससे लिए ये केवल खेल ही नहीं बल्कि एक साइकोलॉजिक वेपन भी है। हम बात सोवियत संघ की कर रहे हैं। 

ये माना जाता है कि सोवियत संघ के लिए शतरंज सिर्फ़ एक खेल नहीं है। ये  वेसर्टन वर्ल्ड के साथ कम्युनिज्म कल्चर वॉर में एक साइकोलॉकिल वेपन है। इसलिए जब विश्व चैंपियन अनातोली कारपोव ने बगियो शहर के सुदूर फ़िलीपीन रिसॉर्ट में टाइटल के लिए  तेजतर्रार विक्टर कोरचनोई के साथ मुकाबला किया, तो सोवियत शतरंज प्रतिष्ठान इसको लेकर कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं नजर आए। उन्हें सलाह देने के लिए सोवियत शतरंज प्रतिषठान ने कारपोव को प्रतिभाशाली सहायकों की एक टीम उपलब्ध करवाई। इसके साथ ही उन्हें महफूज और सुरक्षित रखने के लिए खुफिया एजेंसी केजीबी के पूर्व एजेंट के नेतृत्व में सिक्योरिटी टीम भी भेजी। सम्मोहन में विशेषज्ञ माने जाने वाले न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट डॉ. व्लादिमीर ज़ौखर भी कारपोव की मदद के लिए नियुक्त किए गए थे। 

केजीबी और अमेरिकन सीक्रेट सर्विस के जासूस तैनात

दूसरी तरफ वेसर्टन कंट्री भी कहां पीछे रहने वाले थे। कोर्चेनोई की टीम में भी विविधता थी। इसमें इंग्लैंड के दो युवा शतरंज विशेषज्ञ, एक अमेरिकी स्पाई वर्ल्ड से जुड़ी ऑस्ट्रियाई मूल की महिला रासपुतिन को उनकी सिक्योरिटी के लिए तैनात किया था। कोर्चनोई मास्को की सभी चालों के लिए तैयार थे। सोवियत प्रेस के लिए कोर्चनोई की जीत की संभावना इतनी भयावह थी कि उसने उसका नाम लेने से परहेज कर दिया गया था। अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ के नियमों के अनुसार, छह गेम जीतने वाले को ही विजेता माना जाएगा। इसमें ड्रॉ को काउंट से बाहर रखा गया। कारपोव और कंपनी ने 32 गेम के टफ मुकाबले में छह-से-पांच की मामूली जीत हासिल की। कारपोव ने सतर्कतापूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जिसे कुछ टिप्पणीकारों ने "बोआ कंस्ट्रिक्टर" शैली बताया। इंग्लैंड के अंतर्राष्ट्रीय मास्टर हैरी गोलेम्बेक ने अफसोस जताते हुए तब कहा था कि याद रखने लायक एक भी खेल नहीं था। ये शतरंज के लिए एक अपमान है। 

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दही के प्याले से भेजा सिग्नल

मैच शुरू ही हुआ था कि कोरचनोई ने आरोप लगाया कि कार्पोव के सहायकों ने चैंपियन को स्नैक्स के अंदर कोडित निर्देश भेजे थे, जिन्हें वह खेल के दौरान खाते थे। कोरचनोई ने शिकायत की: 20 चालों के बाद दही का मतलब हो सकता है 'हम आपको ड्रॉ को अस्वीकार करने का निर्देश देते हैं', या मसालेदार बटेर के अंडों की एक डिश का मतलब हो सकता है 'एक बार में पांच नाइट से नाइट खेलें।" इसके बाद, अधिकारियों ने चैंपियन के स्नैक्स को दही के एक ही स्वाद तक सीमित कर दिया।

हिप्नोटाइज करने की कोशिश?

शुरुआती खेलों के दौरान, कारपोव के न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट ज़ौखर बागुइओ सिटी के नए एम्फीथिएटर की अगली पंक्ति में बैठे थे। वो चैलेंजर को परेशान होकर घूर रहे थे। जब कोरचनोई ने डॉक्टर को दूर से हिप्नोटाइज करने की कोशिश करने के लिए बाहर निकालने की मांग की, तो अधिकारियों ने ज़ौखर को हॉल के पीछे बैठने का आदेश दिया। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। 17 खेलों के बाद, कारपोव ने 4-से-1 की शानदार बढ़त बना ली थी।

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