By दिव्यांशी भदौरिया | Mar 14, 2026
हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल खरमास की शुरुआच 15 मार्च यानी कल से हो रही है, जो कि 13 अप्रैल तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के दौरान, इस अवधि में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, यज्ञ, नए व्यापार की शुरुआत या वाहन और घर की खरीदारी जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तब से खरमास लगता है। इसको मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह समय आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए बेस्ट माना जाता है।
कब से शुरू होगा खरमास?
पंचांग के मुताबिक 14 मार्च 2026 की आधी रात को सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस गोचर के साथ ही खरमास का आरंभ माना जाता है। हालांकि उदया तिथि के अनुसार इसका प्रभाव 15 मार्च से शुरू होगा। सूर्य लगभग एक महीने तक मीन राशि में रहेंगे और इसी अवधि को खरमास का समय माना जाता है।
क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों में स्थित होते हैं, तो उनकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। यही वजह है कि इस समय को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि इस दौरान सूर्य की ऊर्जा संतुलित नहीं रहती, इसलिए नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से परहेज करना बेहतर माना जाता है।
इन मंत्रों का जाप करना शुभ होता है
खरमास के समय भगवान विष्णु और सूर्यदेव के मंत्रों के जप से आपको आरोग्य, धन और यश की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इन मंत्रों का नियमित जप नकारात्मकता ऊर्जा को दूर रखने का भी काम करता है।
भगवान विष्णु के मंत्र
- ॐ नमोः नारायणाय॥
-ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
- विष्णु गायत्री मंत्र - ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
विष्णु शान्ताकारम मंत्र
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
मंगलम भगवान विष्णु मंत्र
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
विष्णु अष्टाक्षर मंत्र -
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो नारायणाय
सूर्य देव मंत्र
ॐ सूर्यनारायणायः नमः।
ऊँ घृणि सूर्याय नमः
सूर्य देव के 12 दिव्य मंत्र -
-ॐ मित्राय नमः
-ॐ रवये नमः
-ॐ सूर्याय नमः
-ॐ भानवे नमः
-ॐ खगाय नमः
-ॐ पूष्णे नमः
-ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
-ॐ मरीचये नमः
-ॐ आदित्याय नमः
-ॐ सवित्रे नमः
-ॐ अर्काय नमः
-ॐ भास्कराय नमः