By दिव्यांशी भदौरिया | Oct 20, 2026
असल में किडनी और हार्ट शरीर के दो ऐसे महत्वपूर्ण अंग है, जिसका कार्य अलग-अलग है फिर भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा है। किडनी खून से अपशिष्ट पदार्थ (टॉक्सिन्स) और अतिरिक्त पानी के बाहर निकालने में मदद करती है, बल्कि हार्ट पूरे शरीर में खून पंप करता है।
किडनी और हार्ट के बीच क्या कनेक्शन होता है?
किडनी और हार्ट एक-दूसरे के कामकाज पर निर्भर हैं। हार्ट खून को पंप करता है, जबकि किडनी खून को साफ कर अतिरिक्त पानी बाहर निकालती है। इनमें से किसी एक की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर ब्लड प्रेशर बढ़ने और दूसरे अंग पर दबाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
किडनी डिजीज में हाई ब्लड प्रेशर होने का जोखिम
अमेरिकन किडनी फंड के अनुसार, किडनी की बीमारी और हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशनस के बीच दोतरफा संबंध होता है। लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाएं और खून से फिल्टर करने वाली संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। जिससे किडनी को खून को फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है। दूसरी ओर, जब किडनी खराब होती है, तो वह शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी को पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकाल पाती है।
फिर शरीर में तरल पदार्थ बढ़ता है और ब्लड प्रेशर ऊपर जा सकता है। हमारे शरीर में किडनी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने वाले हार्मोनल सिस्टम को भी प्रभावित करती है।
कुछ परिस्थितियों में यह सिस्टम एक्टिव होने से रक्त वाहिकाएं संकरी हो सकती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। वैसे यह ऐसा चक्र बन सकता है जिसमें हाई ब्लड प्रेशर किडनी को और नुकसान पहुंचाता है, जबकि खराब किडनी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना ठीक बना देती है।
किडनी डिजीज और हार्ट फेलियर के बीच क्या संबंध है?
अमरेकिन हार्ट एसोसिशन के अनुसार, हार्ट फेलियर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हार्ट शरीर की जरुरत के अनुसार ही खून पंप नहीं कर पाता या उसे ऐसा करने के लिए अधिक दबाव के साथ काम करना पड़ेगा। इसका यह अर्थ नहीं है कि हार्ट ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया है।
किडनी की बीमारी और हार्ट फेलियर एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं सीकेडी में हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ, रक्त वाहिकाओं की क्षति और अन्य मेटाबॉलिक बदलाव हार्ट पर दबाव बढ़ा सकते हैं।
जब हार्ट फेलियर में किडनी तक पहुंचने वाले खून का प्रवाह कम हो सकता है। शरीर में रक्त का दबाव और तरल पदार्थों का वितरण भी बदल सकता है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता बिगड़ जाती है।