By अनन्या मिश्रा | May 12, 2026
किडनी की पथरी एक ऐसी समस्या है, जिसके होने पर व्यक्ति को बहुत ज्यादा दर्द का सामना करना पड़ता है। जब हमारे यूरिन में मौजूद नमक और मिनरल्स एक जगह जमा होकर सख्त हो जाता है, तब वह छोटे-छोटे स्टोन का रूप ले लेते हैं। जो कि किडनी स्टोन के रूप में जाना जाता है। यह न सिर्फ शरीर को दर्द पहुंचाता है, बल्कि सही इलाज न मिलने पर किडनी के काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। अक्सर ऐसा कहा जाता है कि हमारे खानपान और कम पानी पीने की वजह से किडनी स्टोन हो सकता है।
कम पानी पीना भी किडनी स्टोन होने का एक बड़ा कारण होता है। जब आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं, तो आपका पेशाब गाढ़ा हो जाता है। जिससे ऑक्सालेट और कैल्शियम जैसे मिनरल्स क्रिस्टल बनकर पथरी का रूप लेते हैं। कम पानी पीने से किडनी स्टोन होने का खतरा 50% तक बढ़ जाता है। ऐसे में इनको शरीर से बाहर निकालने के लिए आपका हाइड्रेटेड रहना जरूरी है।
पहली बार और बार-बार होने वाली किडनी की पथरी मरीजों में कम पानी पीने और कम पेशाब की मात्रा होने से होती है। पेशाब कम बनने से इसमें मौजूद गंदगी या अपशिष्ट पदार्थों का गाढ़ापन बढ़ जाता है। जिससे पेशाब में पथरी बनाने वाले तत्व अधिक जमा हो जाते हैं। इससे क्रिस्टल बनने और पथरी के बढ़ने में मदद मिलती है।
शरीर में पानी की कमी से पेशाब की मात्रा कम हो जाती है। जिससे मिनरल्स की सांद्रता 20-30% तक बढ़ जाती है। पानी का सेवन बढ़ाने से किडनी स्टोन के दोबारा होने का खतरा 50% तक कम हो जाता है। अगर आप पेशाब को पतला रखते हैं, तो इसमें क्रिस्टल नहीं बन पाते हैं।
किडनी की पथरी को रोकने के लिए पानी का सेवन बढ़ाना फायदेमंद है। अगर आप चाहते हैं कि आपको दोबारा किडनी की पथरी न हो तो इतना पानी पिएं कि दिनभर में कम से कमि 2 से 2.5 लीटर पेशाब आए। वहीं यह भी माना जाता है कि ज्यादा मात्रा में पानी पीने से यूरिन की मात्रा और फ्लो बढ़ता है। जोकि कैल्शियम फॉस्फेट, कैल्शियम ऑक्सालेट और यूरिक एसिड की ज्यादा सांद्रता को कम करता है।
पीठ या किनारे कि हिस्से और पसलियों के नीचे अचानक और तेज होने वाले दर्द की समस्या किडनी स्टोन का संकेत होता है।
पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या अन्य किसी रंग का होना।
पेशाब के दौरान बहुत ज्यादा दर्द या तेज जलन होना। या फिर बार-बार पेशाब लगने जैसा महसूस होना।
शरीर में तेज दर्द होने की वजह से जी मिचलाना, चक्कर आना या उल्टी जैसा महसूस होना।
अगर आपको दर्द के साथ तेज फीवर और कंपकंपी जैसा महसूस हो या यह यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। जोकि किडनी स्टोन की ओर इशारा करता है।
शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना आपकी सेहत को बेहतर रखता है। वहीं किडनी की पथरी जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए भी जरूरी है। इसलिए आप भी इन टिप्स की मदद से अपने शरीर में हाइड्रेशन की जांच कर सकते हैं।
अगर आप हाइड्रेटेड हैं या फिर डिहाइड्रेटेड इस बार का पता आपके पेशाब के रंग से चल सकता है। अगर आपको पेशाब हल्के पीले रंग की हो रही है, तो यह पर्याप्त मात्रा में पानी पीने का संकेत होता है। लेकिन अगर आपको गहरे पीले रंग का पेशाब हो रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में पानी की कमी है।
पानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगना, सिर में दर्द होना, मुंह सूखना और थकान महसूस होना भी डिहाइड्रेशन का लक्षण होता है।
आप एक सप्ताह तक किसी ऐप या फिर मार्किंग वाली बोतल का इस्तेमाल करके भी जान सकते हैं कि आप हाइड्रेटेड रहने के लिए सही मात्रा में पानी पी रहे हैं या फिर नहीं।
एक स्टडी के मुताबिक किडनी की पथरी में व्यक्ति को पूरे दिन में 2.5 लीटर से अधिक पानी पीना चाहिए। वहीं कम से कम 2 लीटर पेशाब का आउटपुट बनाए रखना चाहिए। ऐसा करने से आप किडनी की पथरी के जोखिम को कम कर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में करीब 2.5 से 3 लीटर यानी की 10 से 12 गिलास पानी पीना चाहिए। हालांकि आप पानी पीने के प्रोसेस को अलग-अलग चरणों में भी बांट सकते हैं।
सुबह उठते ही सबसे पहले 1 गिलास पानी पिएं।
फिर दोपहर को खाना खाने से पहले 2 गिलास पानी पिएं।
दोपहर के बीच में 2 गिलास पानी पीएं।
रात में खाना खाने से पहले 2 गिलास पानी पिएं।
रात को सोने से पहले 1 या 2 गिलास पानी पिएं।
अगर आप बहुत गर्मी में रहते हैं, एक्सरसाइज करते हैं या फिर आपको डायबिटीज जैसी बीमारी है, तो आप डॉक्टर की सलाह पर पानी की मात्रा बढ़ा सकते हैं।
तरबूज और खीरा जैसे ताजे और पानी से भरपूर फल और सब्जियां खानी चाहिए। साथ ही सादा पानी पीने पर भी ध्यान दें।
पेशाब के रंग पर ध्यान दें, जिससे कि आप हाइड्रेशन की स्थिति का आसान से पता लगा सकें।
अगर आपको बार-बार किडनी में पथरी होती है, या परिवार में स्टोन की हिस्ट्री रही है, पेशाब करते समय दर्द या जलन महसूस होती है या फिर पेशाब में खून आता है। तो ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
वहीं अगर आपको पेशाब करने में समस्या आती है, तेज बुखार या सूजन की समस्या है और अक्सर डिहाइड्रेटेड रहते हैं। तो आपको अपना चेकअप समय-समय पर कराते रहना चाहिए। शुरूआत में ही यूरिन टेस्ट और इमेजिंग से समस्याओं के बारे में जल्दी पता चल सकता है। जिससे आप समय पर बीमारी का इलाज करवा सकते हैं।