जिसका डर था वही हुआ! किम जोंग उन ने उतारे 50000 सैनिक, खुशी से झूम उठे पुतिन

By अभिनय आकाश | Aug 11, 2026

रूस और यूक्रेन की जंग को 4 साल से ज्यादा बीत चुका है। दुनिया को लगा था कि यह युद्ध थमेगा लेकिन यह तो और भी भयानक होता जा रहा है। तबाही का मंजर ऐसा है कि इसका असर सिर्फ कीव या फिर मॉस्को पर नहीं है बल्कि पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। पड़ता दिखाई दे रहा है। लेकिन अब इस जंग में एक ऐसी एंट्री हुई है जिसने नाटो से लेकर अमेरिका तक की रातों की नींद उड़ा दी है। पुतिन के सबसे भरोसेमंद दोस्त किम जोंग उन ने अब सिर्फ मिसाइलों से ही नहीं बल्कि अपने 50000 खूंखार सैनिकों को युद्ध के मैदान में उतारने का बड़ा ऐलान कर दिया है। बहुत बड़ा फैसला ले ली है। इस खबर ने राष्ट्रपति जेलेंस्की को हिला कर रख दिया है। 

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नाटो की मदद और किम जोन की एंट्री?

जब अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश यूक्रेन को घातक हथियार भेज रहे हैं तो पुतिन ने भी अपना सबसे बड़ा पत्ता खोल दिया है और रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया ने रूस में 300 से 500 सैनिक तैनात करने का फैसला किया है। जेलस्की अब बुरी तरह से घबराए हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया कि कैसे उत्तर कोरियाई सैनिक अब सीधे रूस की तरफ से लड़ेंगे। जेलंस्की ने दक्षिण कोरिया से एयर डिफेंस सिस्टम लेने के लिए मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने साफ कह दिया है कि हमें ड्रोन और एयर डिफेंस के मामले में तुरंत सहयोग चाहिए क्योंकि खतरा अब दो गुना हो चुका है। अब बात सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं है दोस्तों। उत्तर कोरिया ने अपनी एक घातक मिसाइल यूनिट भी रूस भेज दी है। करीब 90 जांबाज सैनिक वाली यह यूनिट रूस की 112वीं मिसाइल ब्रिगेड के साथ मिलकर काम करेगी। इतना ही नहीं रूस इस तैनाती के जरिए 120 उत्तर कोरियाई बैलेस्टिक मिसाइलें और छह भारी भरकम लांचर युद्ध में झोंकने वाला है। पहले किम जोंग सिर्फ गोला बारूद भेज रहे थे लेकिन अब पहली बार उत्तर कोरिया की पूरी मिसाइल यूनिट रूसी धरती पर तैनात है। यह रूस और उत्तर कोरिया के सैन्य संबंधों का सबसे बड़ा और खतरनाक विस्तार है।

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आखिर किम जोंग उन इतना रिस्क क्यों ले रहे हैं?

जून 2024 में जब राष्ट्रपति पुतिन पयोंग योंग पहुंचे थे तब दोनों देश के बीच एक ऐतिहासिक रक्षा संधि हुई। इस संधि में साफ लिखा है कि अगर किसी भी देश पर बाहरी हमला होता है तो दूसरा देश तुरंत सैन्य मदद करेगा। यह ठीक वैसा ही है जैसा नाटो का आर्टिकल पांच काम करता है। साल 204 की शुरुआत में भी उत्तर कोरिया ने रूस के कुछ क्षेत्र में 14,000 सैनिक भेजे थे जिन्होंने यूक्रेनी सेना को पीछे धकेलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। 

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