By अंकित सिंह | Apr 26, 2025
पहलगाम में हुए दुखद आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा संघर्ष धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन से परे है। उन्होंने इस संघर्ष को 'धर्म' और 'अधर्म' के बीच संघर्ष बताया, उनके अनुसार यह संघर्ष केवल धार्मिक मतभेदों पर आधारित नहीं है, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच एक बड़ी नैतिक लड़ाई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अहिंसा हमारा स्वभाव है, हमारा मूल्य है। लेकिन कुछ लोग नहीं बदलेंगे, चाहे आप कुछ भी कर लें, वे दुनिया को परेशान करते रहेंगे, तो इसके बारे में क्या करें?
भागवत ने कहा कि अभी जो लड़ाई चल रही है, वह संप्रदाय और धर्म के बीच नहीं है। इसका आधार संप्रदाय और धर्म है, बल्कि यह लड़ाई 'धर्म' और 'अधर्म' के बीच है। हमारे सैनिकों या हमारे लोगों ने कभी किसी को उसका धर्म पूछकर नहीं मारा। जो कट्टरपंथी लोगों ने लोगों को उनका धर्म पूछकर मारा, हिंदू ऐसा कभी नहीं करेंगे। इसलिए देश को मजबूत होना चाहिए। सभी दुखी हैं, हमारे दिलों में गुस्सा है जैसा कि होना चाहिए, क्योंकि राक्षसों का नाश करने के लिए अपार शक्ति की आवश्यकता होती है। लेकिन कुछ लोग इस बात को समझने को तैयार नहीं हैं, और उनमें अब किसी भी तरह का बदलाव नहीं हो सकता।