By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 29, 2026
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने नसीरुद्दीन शाह को एक ‘खतरनाक शहरी दिमागी नक्सली’ करार देते हुए कहा है कि उनके विचार भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘बेहद हानिकारक’ हैं। शाह ने एक वीडियो पोस्ट करके केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रीजीजू ने बुधवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह शाह का सम्मान करते थे, लेकिन उन्हें शाह के ‘असली चरित्र’ के बारे में बहुत देर से पता चला।
उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ लिखी एक पिन भी लगा रखी थी, जिसे उन्होंने कैमरे के सामने दिखाया। रीजीजू ने अभिनेता की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘मुझे लगा था कि नसीरुद्दीन शाह बस एक अभिनेता हैं। मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था... मुझे कभी पता नहीं था कि वह एक खतरनाक ‘शहरी दिमागी नक्सली’ हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उनके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला।
(उनके विचार) भारत के लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक हैं।’’ दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में किया था। उन्होंने ‘दिमागी नक्सलियों’ को ऐसे लोगों के रूप में बताया, जो कथित तौर पर तंत्र में गहराई तक पैठ बना चुके हैं समाज के लिए खतरा बने हुए हैं। शिवसेना नेता शायना एनसी ने भी बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में शाह की टिप्पणी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, ‘‘सवाल यह है कि क्या नसीरुद्दीन शाह सरफरोश के एसीपी राठौड़ हैं या गुलाम हसन? वह शहरी नक्सलवाद, टुकड़े-टुकड़े गैंग के समर्थन और देश-विरोधी गतिविधियों के बारे में बात करते हैं। श्रीमान्, पूरे सम्मान के साथ आपसे मेरा सवाल यह है कि क्या आप भारत के समर्थन में नारे लगाने में विश्वास रखते हैं या भारत-विरोधी नारों में?’’ आमिर खान अभिनीत एक्शन ड्रामा सरफरोश में शाह ने खलनायक, गुप्त एजेंट गुलफाम हसन का किरदार निभाया था।
वर्ष 1999 की इस सुपरहिट फिल्म में खान एसीपी अजय सिंह राठौड़ की मुख्य भूमिका में थे। शाह (76) अक्सर वीडियो पोस्ट करके विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर अपना समर्थन जताते रहे हैं। उन्होंने जुलाई में नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में हुए विरोध-प्रदर्शन को सरकार द्वारा संभालने के तरीके की भी आलोचना की है।
पिछले हफ्ते, शाह ने ‘सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट’ के उन विद्यार्थियों के समर्थन में भी अपनी आवाज़ उठाई, जो परिसर में हुई हिंसक घटनाओं को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। मंगलवार को अपने एक वीडियो में शाह ने कहा, ‘‘मैं गर्व से कहता हूं कि मैं एक दिमागी नक्सल हूं। मुझे नहीं पता कि चौकीदारों ने मुझ जैसे लोगों को और क्या-क्या नाम दिए हैं—जैसे राष्ट्र-विरोधी , टुकड़े-टुकड़े गैंग , और न जाने क्या-क्या।’’