जानिए क्यों होता है चिकनपॉक्स और कैसे बचें इससे

By मिताली जैन | Apr 13, 2020

चिकनपॉक्स जिसे आमभाषा में लोग छोटी माता के नाम से भी जानते हैं, यह वास्तव में एक बेहद ही संक्रामक बीमारी है। चिकनपॉक्स का संक्रमण होने पर पूरे शरीर में फुंसियों जैसी चक्तियां होती हैं और इससे पूरे शरीर में काफी खुजली होती है। वैसे तो यह बीमारी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन एक से दस साल की उम्र के बच्चे को इस रोग के होने का खतरा अधिक रहता है। इस बीमारी के रोकथाम के लिए टीका उपलब्ध है, लेकिन अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखें तो आप इससे अपना बचाव कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−

 

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पहचानें लक्षण

चिकनपॉक्स होने पर पूरे शरीर में फुंसियों जैसे चकत्ते होते हैं। लेकिन चिकन पॉक्स की शुरुआत में पैरों, पीठ में दर्द, शरीर में हल्का बुखार, हल्की खांसी, भूख में कमी, सिर दर्द, थकावट, उल्टियां आदि लक्षण नज़र आते हैं। उसके बाद 24 घंटों के अन्दर पेट या पीठ और चेहरे पर लाल खुजलीदार फुंसियां उभरने लगती हैं, जो बाद में पूरे शरीर में फैलने लगती हैं। 


कारण

चिकनपॉक्स बीमारी होने के अगर कारण की बात हो तो यह वेरिसेला जोस्टर नामक वायरस के कारण होता है। चिकनपॉक्स वास्तव में एक छूत की बीमारी है। अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति संक्रमित बच्चे या वयस्क के संपर्क में आता है, तो उसे भी यह संक्रमण हो जाता है। चिकनपॉक्स सबसे संक्रामक रोगों में से एक है। जिन लोगों को कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ है और कभी टीका नहीं लगाया गया है उन्हें संक्रमण का सबसे अधिक खतरा होता है। इसकी पहचान के लिए किसी तरह के टेस्ट की जरूरत नहीं होती।

 

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बचाव

कहते हैं कि इलाज से बेहतर है बचाव और चिकनपॉक्स से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है टीकाकरण। बच्चों को चिकनपॉक्स से निवारण के लिए दो खुराक दी जाती हैं। पहली 12 से 15 महीने के बीच और दूसरी चार से छह साल की उम्र के बच्चों को। यह टीकाकरण चिकनपॉक्स को रोकने में 90 प्रतिशत प्रभावी है।

 

इलाज

चिकनपॉक्स आमतौर पर एक या दो सप्ताह के भीतर उपचार के बिना ही ठीक हो जाता है। इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण इसे रोक सकता है। हालांकि डॉक्टर आपको दवा लिख सकता है, जो खुजली और बेचैनी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही यह भी कि संक्रमण को दूसरे लोगों में फैलने से कैसे रोक सकता है। 


मिताली जैन


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