जानिए कितनी तरह का होता है लेजर आई ट्रीटमेंट

By मिताली जैन | Aug 20, 2020

आज के समय में हर घर में लोगों को आंखों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोग या तो कान्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं या फिर चश्मा लगाते हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए ऐसा करना थोड़ा बोझिल हो सकता है। इस स्थिति में आंखों  के विशेषज्ञ लेजर आई ट्रीटमेंट की सलाह देते हैं। आंखों की समस्याओं का इस तरह से उपचार करना पिछले कुछ समय से काफी प्रचलित हुआ है। हालांकि लेजर आई ट्रीटमेंट एक नहीं बल्कि कई तरह से किया जाता है। अधिकांश प्रक्रियाएं कॉर्निया को फिर से आकार देने का काम करती हैं ताकि इसके माध्यम से गुजरने वाली रोशनी रेटिना पर ध्यान केंद्रित कर सके। वहीं, अन्य सर्जरी आंख के लेंस को बदल देती है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−

आई एक्सपर्ट बताते हैं कि यह सर्जरी आंख में प्रकाश को केंद्रित करने और रेटिना तक पहुंचने के लिए अंतर्निहति कॉर्नियल ऊतक को फिर से खोलती है। यह प्रक्रिया उन रोगियों के लिए आदर्श है जिन्हें मायोपिया, हाइपरोपिया, प्रेसबायोपिया की समस्या है। क्या LASIK अद्वितीय बनाता है इसकी कार्यप्रणाली है। आंखों के सर्जन अंतर्निहति ऊतक तक पहुंचने के लिए कॉर्निया की बाहरी परत का एक फ्लैप बनाते हैं। इस प्रक्रिया में सटीकता की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया अब ब्लेड मुक्त है। इस प्रक्रिया में दो लेजर का उपयोग किया जाता है।

PRK (फोटोरिफ़्रेक्टिव कोरटक्टॉमी)

आंखों के विशेषज्ञ के अनुसार, पीआरके एक ऐसी प्रक्रिया है जो कॉर्निया को फिर से आकार देने के लिए एक लेजर का उपयोग करती है। LASIK के विपरीत, PRK केवल कॉर्निया की सतह को नयी आकृति प्रदान करता है। यह हल्के से मध्यम निकटता, दूरदर्शिता, या अस्टिग्मटिजम अर्थात दृष्टिवैषम्यता के लिए आदर्श है। PRK कंप्यूटर इमेजिंग तकनीक के साथ भी काम कर सकता है।

इसे भी पढ़ें: कंजक्टिवाइटिस से है बचना, तो करें यह आसान से उपाय

LASEK

आंखों के विशेषज्ञ के अनुसार, यह मायोपिया, प्रेस्बोपिया, अस्टिग्मटिजम अर्थात दृष्टिवैषम्यता के लिए एक रिफ्रेक्टिव सर्जरी है। LASEK अर्थात लेजर असिस्टेड सब एपिथेलियल केराटोमाइल्यूसिस पीआरके के समान ही एक प्रक्रिया है। इसमें भी पीआरके की तरह, कॉर्नियल एपिथेलियम को अंतर्निहति स्ट्रोमल परत से अलग किया जाता है। लेकिन पीआरके की तरह इस ऊतक को पूरी तरह से हटाने और छोड़ने के बजाय अल्टाथिन "फ्लैप" को कॉर्निया के एक तरफ से धकेल दिया जाता है, जहां यह आंख से जुड़ा रहता है। LASEK प्रक्रिया में LASIK सर्जरी की तुलना में अधिक असुविधा होती है और रिकवरी में भी लंबा समय लगता है। 

मिताली जैन

प्रमुख खबरें

3 दिन की Trip, मजा विदेश जैसा! ये 5 Indian Destinations हैं Low Budget में एकदम परफेक्ट

Saudi Arabia ने Hajj और Umrah के लिए बदले Visa नियम, अब सिर्फ 30 दिन की मिलेगी Entry वैधता

Jan Gan Man: Justice Swarana Kanta Sharma ने Arvind Kejriwal को करारा जवाब देकर न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा की

Amit Shah के आरोपपत्र का जवाब, Mamata Banerjee का BJP के खिलाफ Cut-Money पर पलटवार