महामारी विज्ञान के अध्ययन से जुड़ा अनोखा कॅरियर एपिडेमियोलॉजी

By वरूण क्वात्रा | Jun 13, 2020

इन दिनों पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। अभी तक इस महामारी से निपटने के लिए किसी वैक्सीन या दवा का निर्माण नहीं हो पाया है। लेकिन फिर भी इस रोग से बचने के लिए कुछ आवश्यक कदम उठाने की जरूरत होती है। जहां एक्सपर्ट्स इस रोग की वैक्सीन को ढूंढने में लगे हैं, वहीं इस स्थित मिें एपिडेमियोलॉजिस्ट की महत्ता भी काफी अहम् होती है। हालांकि इनके बारे में लोगों को कम ही जानकारी होती है। एपिडेमियोलॉजी विज्ञान की उस शाखा से संबंधित है, जिसमें संक्रामक रोगों के प्रसार का अध्ययन किया जाता है। इस क्षेत्र में एक्सपर्ट्स किसी एक व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि पूरे समुदाय व मानव जाति की रक्षा के लिए काम करते हैं। तो चलिए जानते हैं कि एपिडेमियोलॉजी के क्षेत्र में कैसे बनाएं कॅरियर−

एपिडेमियोलॉजी या महामारी विज्ञान चिकित्सा विज्ञान का एक अंतः विषय क्षेत्र है, जिसमें मानव आबादी में बीमारी और उसके नियंत्रण का अध्ययन किया जाता है। एपिडेमियोलॉजिस्ट एक वैज्ञानिक है जो संक्रामक रोगों के प्रसार का अध्ययन करता है। महामारी विज्ञानियों को अक्सर 'रोग जासूस' के रूप में जाना जाता है क्योंकि वे बीमारी के कारण का पता लगाते हैं और इसके प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाते हैं। एपिडेमियोलॉजिस्ट एक निश्चित क्षेत्र में एक निश्चित बीमारी कैसे और क्यों हुई, यह निर्धारित करने के लिए और रोग के परिणामों के कारणों पर शोध करते हैं। वह बीमारी या बीमारी के प्रकोप पैटर्न को निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण और शरीर के तरल पदार्थ का विश्लेषण करके अपने शोध का संचालन करता है, और फिर वे सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने और भविष्य में होने वाली घटनाओं को रोकने का प्रयास करते हैं। कई महामारी विज्ञानियों ने रोग होने की संभावना के बारे में भविष्यवाणियां कीं, और रोकथाम की रणनीतियों का विकास किया। एक्सपर्ट्स के अनुसार, महामारी विज्ञानियों का मुख्य कार्य संक्रामक बीमारी के फैलने के कारण की जांच करना और भविष्य में होने वाले प्रकोपों को रोकने के लिए कदम उठाना शामिल है।

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स्किल्स

एजुकेशन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि एक सफल एपिडेमियोलॉजिस्ट बनने के लिए व्यक्ति के भीतर दूसरों की सेवा का भाव होना बेहद जरूरी है। महामारी विज्ञानियों में सहनशक्ति, धैर्य, एकाग्रता की शक्ति, भावनात्मक स्थिरता, तार्किक और विश्लेषणात्मक दिमाग, समस्या को सुलझाने की क्षमता, नेतृत्व की गुणवत्ता, समय पर निर्णय लेने की क्षमता, आत्म−चिंतन आदि होना चाहिए। उन्हें स्वतंत्र रूप से या एक टीम के हिस्से के रूप में काम करने में सक्षम होना चाहिए। साथ ही वह मौखिक रूप से और लिखित रूप में, स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से संवाद करने में सक्षम हो। वे महत्वपूर्ण विचारक होने चाहिए, जो अपने निष्कर्षों का विश्लेषण कर सकते हैं, साथ ही साथ उत्पन्न होने वाली आपातकालीन स्थितयिों को पहचान सकते हैं। एक एपिडेमियोलॉजिस्ट को उत्कृष्ट श्रोता होना चाहिए। एक महामारी विशेषज्ञ को गणितीय रूप से सूक्ष्म और सांख्यिकीय विश्लेषण और डेटा प्रस्तुति सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के साथ कुशल होना चाहिए।

योग्यता

एपिडेमियोलॉजिस्ट बनने के लिए व्यक्ति का पब्लिक हेल्थ में स्नात्तकोत्तर की डिग्री होना जरूरी है। वहीं रिसर्च एपिडेमियोलॉजी के क्षेत्र में काम करने के लिए पीएचडी की डिग्री होनी चाहिए।

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रोजगार की संभावनाएं

इस क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं है। हर मेडिकल कॉलेज में एपिडेमियोलॉजिस्ट की जरूरत होती है। इसके अलावा वे सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, प्रयोगशालाओं, दवा व्यवसायों या विश्वविद्यालयों के लिए काम कर सकते हैं। महामारी विशेषज्ञ विश्व स्वास्थ्य संगठन और सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल जैसी सरकारी एजेंसियों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के रूप में काम कर सकते हैं। राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी भी एपिडेमियोलॉजिस्ट के लिए नौकरी के अवसर प्रदान करती हैं। महामारी विज्ञान विशेषज्ञ नैदानिक कंपनियों और गैर−सरकारी संगठनों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए नैदानिक विकास और अनुसंधान में रोजगार पा सकते हैं। वे अस्पतालों में रोगियों में बीमारियों के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए काम करते हुए पाए जा सकते हैं। साथ ही विश्वविद्यालयों में शोध भी कर सकते हैं।

आमदनी

एक एपिडेमियोलॉजिस्ट अपने शिक्षा के स्तर, अनुभव व जहां वे काम करते हैं, वेतन प्राप्त करते हैं। मास्टर्स इन पब्लिक हेल्थ कर चुके एक्सपर्ट्स 20000−45000 रूपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। हालांकि फार्मास्युटिकल और मेडिकल मैन्युफैक्चिरिंग इंडस्ट्री में कार्यरत एपिडेमियोलॉजिस्ट सबसे अधिक वेतन लेते हैं।

प्रमुख संस्थान

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी, चेन्नई

नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेबल डिसीज, दिल्ली

वरूण क्वात्रा

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