Chai Par Sameeksha: जानिए भाजपा आखिर दिल्ली वालों के लिए ऐसा क्या कर सकती है जो AAP अब तक नहीं कर पाई

By टीम प्रभासाक्षी | Jan 28, 2025

प्रभासाक्षी टीम के विशेष कार्यक्रम 'चाय पर समीक्षा' में हमारे एडिटर नीरज कुमार दुबे ने बताया कि जैसे-जैसे दिल्ली चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे ही चुनाव प्रचार का स्तर भी लगातार नीचे गिर रहा है। राज्य की सत्ता पाने के लिए नेता किसी भी हद तक गिरी हुई बोली का इस्तेमाल कर रहे हैं। जो दिल्ली वालों को कतई पसंद नहीं आ रही है। उनके मुताबिक, इस बार के चुनाव में कोई भी नेता मूलभूत सुविधाओं की चर्चा नहीं कर रहा है। सभी पार्टियों रेवड़ी की राजनीति करने में व्यस्त हैं।

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एडिटर नीरज दुबे ने कहा कि इस नए बंगले में लगभग 50 करोड़ से अधिक रुपए लगे हैं। तो यह कहीं ना कहीं केजरीवाल के सिद्धांत वादी विचारों से हटने की ओर साफ संकेत कर रहा है। इसके साथ आप के मुखिया केजरीवाल सरकारी सुरक्षा लेने से भी इनकार करते थे लेकिन अब उनके साथ लगभग 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी चलते हैं। जोकि एक अपने सिद्धांत और बातों से पीछे हटने की घटना है। जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है। हमारे एडिटर ने बताया कि इस बार के चुनाव में दिल्ली की जनता कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार को भी एक मुद्दा बनाते हुए मतदान करेगी।

अरविंद केजरीवाल जोकि भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीति करके सत्ता में आए थे, लेकिन वह खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में गए और उनके साथ पार्टी के कई नेताओं को भी जेल हुई थी। यही प्रमुख वजह है कि अरविंद केजरीवाल इस बार के चुनाव में खुद को 'कट्टर ईमानदार' नहीं कह पा रहे हैं। इसलिए दिल्ली की जनता को इस बार के चुनाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पानी जैसे मूल मुद्दों को लेकर निश्चित रूप से मतदान करना चाहिए।

एडिटर नीरज कुमार दुबे ने बताया कि दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियां के पुनर्निर्माण में जो भी दिक्कतों का सामना दिल्ली सरकार को करना पड़ रहा है। उसे भारतीय जनता पार्टी की सरकार ही दूर कर सकती है, क्योंकि कई कानूनों में बदलाव केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही संभव है। इसीलिए अमित शाह ने पार्टी के घोषणा पत्र में दिल्ली को झुग्गी-झोपड़ियां से मुक्त करने का वादा किया है और यह है दिल्ली के चुनाव में एक मास्टर स्ट्रोक साबित होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस की स्थिति बहुत कमजोर है और वह अब तक 'इंडिया गठबंधन' को लेकर भी अपना कोई खास रूप स्पष्ट नहीं कर सकी है।

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