पार्षद से राज्यपाल, नेहरू कनेक्शन से भ्रष्टाचार के आरोप तक, कौन हैं शीला कौल, जिनके बंगले पर शिफ्ट हो रही हैं प्रियंका

By अभिनय आकाश | Jul 02, 2020

भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को उनका सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को एक महीने के भीतर लोधी रोड का बंगला खाली करना होगा। जिसमें वो वर्ष 1997 यानी कि पिछले 23 वर्षों से रह रही हैं। प्रियंका को लोधी स्टेट स्थित 6बी टाइप का बंगला नंबर 35 अलाॅट है। ये इलाका लुटियंस दिल्ली में आता है, जहां बड़े-बड़े नेता और मंत्रियों के सरकारी आवास हैं। नोटिस में ये कहा गया है कि एसपीजी सुरक्षा हटने के बाद वह इस बंगले में रहने की पात्र नहीं हैं। नोटिस के अनुसार सामान खाली करने के लिए उन्हें एक महीने का वक्त दिया जा सकता है। नियम के मुताबिक उसका किराया चुकाना होगा। प्रियंका को 1 अगस्त 2020 से पहले बंगला खाली करना होगा।

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तैयार है आवास

कांग्रेस मीडिया संयोजक ललन कुमार ने बताया कि पार्टी की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए छह महीने पहले ही तय किया गया था कि वह लखनऊ आकर रहेंगी। दिवंगत शीला कौल के आवास को प्रियंका की जरूरतों के हिसाब से दुरुस्त किया गया है। वह पूर्व में यहां तीन दिन तक रह चुकी हैं। 

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कौन हैं शीला कौल

शीला कौल का जन्म 19 फरवरी 1915 था। उनका विवाह कमला नेहरू के भाई और प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी कौशल नाथ कौल के साथ हुआ था। शीला कौल देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की भाभी और इंदिरा गांधी की मामी थीं। पार्षद के तौर पर अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाली कौल ने 100 साल के अपने लंबे जीवन में उन्होंने कैबिनेट मंत्री से लेकर राज्यपाल तक का पद भार संभाला। 

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लगे थे गंभीर आरोप और निजी सचिव को हुई सजा

साल 1996 में शीला कौल पर पूर्व केंद्रीय शहरी विकास मंत्री रहते हुए अपने निजी स्टाफ के सदस्यों और चालीस से अधिक अन्य व्यक्तियों को सरकारी दुकानों को किराए पर देने के लिए एक षड्यंत्र का आरोप लगा था। सुप्रीम कोर्ट ने विवेकाधीन कोटे के तहत 52 दुकानों और कियोस्क को किराए पर देने के लिए कौल पर 6 मिलियन का जुर्माना लगाया। 13 जून 2015 को 100 साल की आयु में गाजियाबाद में शीला कौल का निधन हो गया। कौल की मृत्यु के एक साल बाद, साल 2016 में एक विशेष अदालत ने उनके पूर्व अतिरिक्त निजी सचिव राजन लाला, एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी, को आवंटन घोटाले में लिप्त बताते हुए 2 साल जेल की सजा सुनाई।

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प्रियंका की राजधानी में मौजूदगी से क्या होगा असर

देश की राजधानी दिल्ली से लगातार प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार पर हमलावर तो रही हैं लेकिन केवल सोशल मीडिया पर ही। ऐसे में रणनीतिक लिहाज से भी प्रियंका गांधी का दिल्ली में होना उत्तर प्रदेश कांग्रेस खेमे को कहीं न कहीं कमजोर करता है। जिसकी बानगी बीते दिनों प्रवासी मजदूरों के लिए हुए 'बस पॉलिटिक्स' में भी देखने को मिली। जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की गिरफ्तारी हुई थी। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस उतनी मजबूत नहीं नजर आ रही थी। इसके अलावा हाल ही में यूपी पुलिस ने कांग्रेस पार्टी के अल्‍पसंख्‍यक प्रकोष्‍ठ के अध्‍यक्ष शाहनवाज आलम को पिछले साल (2019) हुए नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार कर‍ लिया था। कांग्रेस नेता की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए जब यूपी कांग्रेस के अध्‍यक्ष अजय कुमार लल्‍लू हजरतगंज थाने पहुंचे तो पुलिस ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को हटाने के लिए लाठीचार्ज कर दिया गया। ऐसे में प्रदेश प्रभारी प्रियंका की राजधानी लखनऊ में एंट्री के बाद कार्यकर्ताओं में एक नया जोश देखने को मिल सकता है। इसके अलावा किसी बड़े नेता का साथ पाकर संगठन में भी नया जान आने की उम्मीद है और ऐसे में वो नेता अगर गांधी परिवार से हो (जिसके खूंटे से कांग्रेस खुद को कभी अलग नहीं कर सकती) तो बात ही कुछ और है। 

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