Krishnapingala Sankashti Chaturthi: 3 या 4 जुलाई? दूर करें Confusion, नोट करें सही Date और Time

By दिव्यांशी भदौरिया | Jul 01, 2026

हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं, संकष्टी चतुर्थी के व्रत बेहद ही महत्वपूर्ण माना जता है। सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत प्रथमपूज्य भगवान गणेश को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा और व्रत करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्री गणेश अपने सभी भक्तों पर कृपा बरसाते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनीं रहती है। जीवन की सभी बाधाएं दूर रहती हैं। आइए आपको बताते हैं कब कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की तिथि 

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ के महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 03 जुलाई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर हो रही है और चतुर्थी तिथि का समापन अगले दिन 04 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। 

विशेषतौर पर संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसलिए आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर 03 जुलाई को चंद्रोदय प्राप्त हो रहा है। इस दिन चंद्रोदय 9 बजकर 53 पर होगा। इसलिए इस साल कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत 03 जुलाई को रखा जाएगा।

जानिए कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त

इस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त तड़के सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 47 मिनट पर होगा। जबकि अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहने वाला है। भगवान गणेश जी की पूजा का समय लाभ-उन्नति मुहूर्त 07 बजकर 12 मिनट से 08 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। हालांकि, अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 08 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक रहने वाला है। 

सर्वार्थ सिद्धि योग में करें गणेश का पूजन

इस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहने वाला है। बता दें कि, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 05 बजकर 28 मिनट से 11 बजकर 46 तक रहेगा। इस योग में गणेश जी की पूजा करें।

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि

- इस दिन सुबह सबसे जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करना काफी जरुरी है और इसके बाद स्नान आदि करें।

 - अब भगवान गणेश जी की पूजा के लिए संकल्प लें। इसके बाद श्री गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर उनकी पूजा करें। 

 - इस पूजा में आप दीप, धूप, फल, फूल आदि का प्रयोग करें। इसके बाद भगवान गणेश जी की कथा सुनें और फिर भजन कीर्तन करें।

 - व्रत के आखिर में व्रती को भगवान गणेश को अर्पित किया गया प्रसाद खिलाएं।

  - इसके बाद व्रत की पूर्णता का संकल्प लें। 

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