UGC विवाद में कूदे Kumar Vishwas, कविता शेयर कर बोले- 'मैं अभागा सवर्ण हूं, मुझे उखाड़ लो'

By अंकित सिंह | Jan 27, 2026

उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा संशोधित नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। नए दिशानिर्देशों ने उच्च जाति के लोगों में तीव्र आक्रोश पैदा कर दिया है और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। इस बढ़ते असंतोष के बीच, जाने-माने कवि कुमार विश्वास भी UGC के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। X पर उन्होंने दिवंगत रमेश रंजन की एक कविता साझा करते हुए नए नियमों की निंदा की। 

अब अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र इस समिति के समक्ष जातिगत भेदभाव की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पहले केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र ही ऐसी शिकायतें दर्ज कराने के पात्र थे, लेकिन अब अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को भी शामिल कर लिया गया है। नियमों में समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों का अनिवार्य प्रतिनिधित्व निर्धारित है, लेकिन उच्च जाति के छात्रों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है। यह बहिष्कार विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।

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यूजीसी अधिनियम का विरोध करने वालों का तर्क है कि किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे पीड़ित या आरोपी किसी भी जाति का हो। वे मांग करते हैं कि उच्च जाति के छात्रों को भी "सुदामा कोटा" या "भीकारी" जैसे अपमानजनक टिप्पणियों से बचाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि झूठी शिकायत दर्ज करने पर पहले की तरह ही कड़ी सजा मिलनी चाहिए। विपक्षी दल भी इस मामले में सक्रिय हो गए हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने कहा कि अगर सरकार भेदभावपूर्ण कानून लाती है, तो उसे संसद के अंदर और सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ेगा।

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