Kuwait Security Risk: US Troops की मौजूदगी पर उठे सवाल, Iran के हमलों में भारी Casualties से हड़कंप

By Ankit Jaiswal | Aug 25, 2026

कुवैत में इन दिनों युद्ध को लेकर माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है। कभी इराकी सेना के कब्जे से मुक्ति दिलाने वाली अमेरिकी सेना को सुरक्षा की गारंटी माना जाता था, लेकिन अब ईरान के लगातार हमलों के बीच कुछ कुवैती नागरिक अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी को ही अपने लिए खतरे की वजह मानने लगे हैं। छह महीने से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध ने इस खाड़ी देश को मुश्किल स्थिति में ला खड़ा किया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले शुरू होने के बाद क्षेत्रीय संघर्ष लगातार बढ़ता गया। ईरान और उसके सहयोगियों ने कुवैत में कई बार हमले किए। इन हमलों में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले सैन्य ठिकानों के अलावा पानी साफ करने वाले संयंत्र और ऊर्जा प्रतिष्ठान जैसे नागरिक ढांचे भी निशाने पर आए हैं।

कुवैत की मुश्किल केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से भी कुवैत पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। यह देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जुड़ा हुआ है और उसकी आय का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात पर निर्भर है। युद्ध के कारण समुद्री परिवहन और ऊर्जा कारोबार प्रभावित होने की आशंका ने खाड़ी की अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है।

इसके बावजूद गनीम अलसुलैमानी अमेरिका के साथ संबंधों को जरूरी मानते हैं। उनका कहना है कि ईरान का उद्देश्य खाड़ी देशों को अमेरिकी दबाव बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना है। उनके मुताबिक कुवैत पर हमले के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध रोकने या पीछे हटने का फैसला केवल कुवैत पर हमलों की वजह से नहीं करेंगे।

हालांकि, निजी बातचीत में कुछ कुवैती अब अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी पर सवाल उठा रहे हैं। एक कुवैती महिला ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी की कीमत कुवैत को चुकानी पड़ रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अमेरिकी सेना देश में नहीं होती तो ईरान के बढ़ते प्रभाव के बीच कुवैत की सुरक्षा कैसी होती।

गौरतलब है कि कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की बड़ी मौजूदगी है। यहां अमेरिकी सेना के लिए हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और प्रशिक्षण केंद्रों का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि ईरान के लिए कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकाने आसान सैन्य निशाने माने जा रहे हैं। अब तक कुवैत पर हुए ईरानी हमलों में कम से कम 15 लोगों की मौत की जानकारी है, जिनमें छह अमेरिकी सैनिक, चार कुवैती सैनिक और पांच विदेशी नागरिक शामिल हैं।

कुवैत के सामने यही सबसे बड़ा द्वंद्व है। एक तरफ वह अमेरिका को उस देश के रूप में देखता है जिसने 1991 में उसे इराकी कब्जे से आजाद कराया था, तो दूसरी तरफ अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी के कारण वह ईरान के हमलों की चपेट में भी आ रहा है।

बता दें कि क्षेत्र में अमेरिका के प्रति समर्थन पहले ही कमजोर हुआ है। गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को अमेरिकी समर्थन मिलने के बाद कुवैत सहित कई अरब देशों में अमेरिकी कंपनियों के बहिष्कार के अभियान भी देखने को मिले थे। इसके बावजूद ईरान के बढ़ते प्रभाव और मौजूदा सुरक्षा हालात में कुवैत के लिए अमेरिका का विकल्प तलाशना आसान नहीं है।

कुवैत में अब युद्ध को लेकर चर्चा आम लोगों की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन चुकी है। बाजारों, रेस्तरां और सार्वजनिक स्थानों पर लोग लगातार बदलते हालात पर नजर रख रहे हैं। अमेरिकी सेना के साथ सुरक्षा सहयोग जारी है, लेकिन हाल के हमलों ने कुवैती नागरिकों के बीच डर और असमंजस जरूर बढ़ा दिया है। ऐसे में कुवैत के सामने सुरक्षा, आर्थिक हित और क्षेत्रीय संतुलन के बीच रास्ता तलाशने की चुनौती बनी हुई है।

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