Labor Code लागू: करोड़ों कामगारों को मिलेगा पक्का वेतन और सुरक्षा का कवच, बदलेंगे काम के नियम

By Ankit Jaiswal | Nov 24, 2025

सरकार द्वारा लंबे समय से चली आ रही तैयारियों के बाद अब देश में श्रम कानूनों का सबसे बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं, जिनका असर देश के लगभग हर तरह के कामगार पर पड़ने वाला है। बता दें कि इन कोड्स में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और कार्यस्थल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।

सरकार द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार हर कर्मचारी को अब नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा, जिससे रोजगार का रिकॉर्ड औपचारिक रूप से दर्ज किया जा सकेगा। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा के दायरे को भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ाया गया है। अब EPF, ESI और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएँ केवल संगठित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अलग-अलग सेक्टर के कर्मचारियों तक पहुंचेंगी।

गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों के लिए एक अलग सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाएगा, जिसमें एग्रीगेटर कंपनियों को अपने टर्नओवर का 1 से 2 फीसदी योगदान देना होगा। सभी कामगारों के लिए एक आधार-लिंक्ड यूनिवर्सल अकाउंट नंबर भी बनाया जाएगा, जिससे देश में कहीं भी नौकरी बदलने पर लाभ प्राप्त करना आसान हो जाएगा।

महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और समानता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। नए कोड में लैंगिक भेदभाव पर सख्त रोक है और महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति दी गई है, बशर्ते सुरक्षा के सभी प्रबंध किए जाएँ। शिकायत निवारण समितियों में अब महिला प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी और परिवार की परिभाषा में सास–ससुर को भी शामिल किया गया है।

कामगार सुरक्षा के संदर्भ में 40 वर्ष से ऊपर के कर्मचारियों के लिए साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है। खतरनाक उद्योगों के लिए सुरक्षा समितियाँ बनाना, सुरक्षात्मक उपकरण देना और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होगा। खास बात यह है कि कई मामलों में सफर के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को भी कार्यस्थल दुर्घटना माना जाएगा।

फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को लेकर बड़ा बदलाव यह है कि अब उन्हें केवल एक वर्ष की सेवा पर ग्रेच्युटी मिलेगी, जबकि पहले पांच साल की शर्त थी। कॉन्ट्रैक्ट वर्करों के लिए स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा लाभ मुख्य नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे। ओवरटाइम नियमों को सख्त किया गया है और इसके भुगतान को सामान्य वेतन से दोगुना करने का प्रावधान है।

वेतन भुगतान की समय-सीमा को कम किया गया है और सवेतन अवकाश का अधिकार 180 दिन पूरे होने के बाद मिल जाएगा। कई उद्योगों जैसे बीड़ी, खनन, टेक्सटाइल और MSME सेक्टर में 8 से 12 घंटे की मानकीकृत शिफ्ट लागू की जाएंगी, जिससे काम की अनियमितता कम होगी।

नियोक्ताओं के लिए भी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब कंपनियों को कई फॉर्म और अलग-अलग रजिस्ट्रेशनों की जगह केवल एक पंजीकरण, एक लाइसेंस और एक वार्षिक रिटर्न भरना होगा। सरकार का कहना है कि इंस्पेक्शन अब दंड पर आधारित न होकर परामर्श आधारित होंगे, यानी अधिकारी पहले मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।

सरकार के अनुसार 2015 में 19 फीसदी सामाजिक सुरक्षा कवरेज अब बढ़कर 64 फीसदी से अधिक हो गया है, और नए लेबर कोड देश में एक “प्रो–वर्कर, प्रो–वूमेन और प्रो–यूथ” श्रम व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

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