By रेनू तिवारी | Apr 27, 2026
लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलनरत संगठनों ने केंद्र सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी लद्दाख दौरे (30 अप्रैल) के दौरान उनसे सीधे "निर्णय-स्तर" की वार्ता करने का आह्वान किया है। संगठन ने 22 मई के लिए प्रस्तावित उप-समिति की बैठक को "अपर्याप्त और व्यर्थ" करार दिया है। यह प्रतिक्रिया उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा रविवार को यह घोषणा किये जाने के बाद आयी कि गृह मंत्रालय ने आंदोलनकारी लद्दाख समूहों के प्रतिनिधियों के साथ राजनीतिक वार्ता के लिए उप-समिति की बैठक 22 मई को बुलाने का निर्णय लिया है। पिछली बैठक फरवरी की शुरुआत में हुई थी।
वांगचुक के साथ एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे और समूह के अन्य प्रमुख सदस्य भी मौजूद थे। वांगचुक ने कहा कि इस दौरे को ‘‘सार्थक और रचनात्मक संवाद’’ की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह सर्वविदित है कि उप-समिति स्तर पर - यानी सचिवों के स्तर पर - होने वाली चर्चाओं में निर्णय लेने वाले प्राधिकार शामिल नहीं होते हैं। इसलिए, चिंता इस बात की है कि यदि यह बैठक फरवरी में हुई पिछली बैठक के चार महीने बाद 22 मई को होती है और फिर भी कोई निर्णय नहीं निकलता है, तो चार महीने और बीत सकते हैं और पूरा साल बिना किसी समाधान के गुजर सकता है।’’
उन्होंने कहा, “इसीलिए हमारे सभी सदस्यों ने सुझाव दिया है कि चूंकि गृह मंत्री स्वयं लद्दाख दौरे पर आने वाले हैं, इसलिए उन्हें एलएबी और केडीए के साथ एक बैठक की अध्यक्षता करनी चाहिए।” वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में ऐसी बैठक आयोजित करना संभव और सार्थक होगा। उन्होंने कहा, “दरअसल, दिल्ली में हुई पिछली बैठकों में शामिल हुए हमारे कुछ सदस्यों ने बताया है कि गृह मंत्री ने लद्दाख के नेतृत्व को आश्वासन दिया था कि वे स्वयं ऐसी बैठकों की अध्यक्षता करेंगे और लद्दाख में भी ऐसी बैठकें आयोजित करने पर विचार करेंगे।”
इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि गृह मंत्री का दौरा इस दिशा में सबसे अच्छा अवसर प्रदान करता है। एलएबी के नेता अशरफ बरचा ने कहा कि उनका मानना है कि उप-समिति स्तर पर चर्चा के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं बचा है, क्योंकि सभी मामलों पर अब तक विस्तार से चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा, “अब निर्णय लेने का समय है। हम सभी के लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि गृह मंत्री लद्दाख आ रहे हैं,हमारा मानना है कि ऐसे में इस अवसर का लाभ उठाया जाना चाहिए। यदि वे उच्चाधिकार समिति के ढांचे के तहत लद्दाख के नेतृत्व के साथ यहां एक संयुक्त बैठक कर सकें, तो यह बहुत लाभकारी होगा। इससे यहां के लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।”
वांगचुक ने तत्काल विश्वास निर्माण उपायों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ मेरे खिलाफ लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) को रद्द करने का मामला नहीं है… बल्कि पिछले सितंबर में हुई गलतियों को सुधारकर जनता का विश्वास फिर से कायम करने का भी मामला है।” विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में रासुका के तहत 26 सितंबर को हिरासत में लिये गए वांगचुक को केंद्र सरकार द्वारा उनकी हिरासत रद्द करने के फैसले के बाद 14 मार्च को जोधपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया था। ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए उन्होंने कहा, “मामलों को रद्द करना और मुआवजे की घोषणा करना गृह मंत्री के दौरे से पहले लोगों में विश्वास जगाने में मददगार होगा।”
दोरजे ने कहा कि एपेक्स बॉडी और केडीए एकमत हैं और “हम एक बार फिर यह कोशिश करेंगे कि हम एकजुटता के साथ बोलें और अलग-अलग विचार रखने वालों को शामिल न करें।” उन्होंने कहा, “हमारा स्पष्ट रुख यह है कि उप-समिति की बैठक पूरी तरह से व्यर्थ है। अगर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता और चर्चा के लिए कुछ नया नहीं बचता, तो इसका क्या मतलब है?” उन्होंने कहा, “हमारी मांगें पहले से ही बहुत स्पष्ट हैं—चार सूत्री एजेंडा। कम से कम सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह क्या पेशकश करने को तैयार है।”
उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए, यदि सरकार लद्दाख को राज्य का दर्जा देने या छठी अनुसूची में शामिल करने का इरादा नहीं रखती है, तो उसे यह बात स्पष्ट रूप से कहनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अभी तक सरकार ने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा है कि वह ये पेशकश नहीं करेगी। यदि ये नहीं, तो विकल्प क्या है? सरकार को कम से कम यह तो स्पष्ट करना चाहिए।” एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के दौरे और 22 मई को प्रस्तावित वार्ता के बारे में एलएबी को भी उपराज्यपाल की सोशल मीडिया पोस्ट से जानकारी मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर 30 अप्रैल को लेह पहुंचेंगे। उपराज्यपाल सक्सेना ने बताया कि गृह मंत्री एक मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।