पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के कहे गए एक-एक शब्द सही साबित हुए, त्रिमूर्ति ने की थी सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता की मांग

By अनुराग गुप्ता | Jan 27, 2022

स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने साल 1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। इस दौरान अंग्रेजी हुकूमत ने लाठी-चार्ज का आदेश दिया। जिसमें लाला लाजपत राय बुरी तरह से जख्मी हो गए थे और उस वक्त उन्होंने कहा था कि मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश हुकूमत के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी। 18 दिनों तक जख्मी हालत में रहने के बाद 17 नवंबर, 1928 को लाला लाजपत राय को निधन हो गया। जिसको लेकर चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव और शिवराम समेत समूचा देश आक्रोशित था। 

पंजाब केसरी की मिली थी उपाधि

पंजाब केसरी लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी, 1865 को पंजाब के मोगा जिले में हुआ था। लाला लाजपत राय ने एक राजनेता, वकील और लेखक के तौर पर अपना योगदान दिया। आर्य समाज से प्रभावित माने जाने वाले लाला लाजपत राय ने स्वामी दयानंद सरस्वती से जुड़कर पंजाब में आर्य समाज को स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी और तो और उन्होंने पूरे देश इसका जमकर प्रचार भी किया। अपने प्रारंभिक जीवन से ही लाला लाजपत राय को लेखन और भाषणों में काफी दिलचस्पी थी। उन्होंने कुछ वक्त तक हरियाणा के रोहतक और फिर हिसार में वकालत भी की। उनके कामों की वजह से उन्हें पंजाब केसरी की उपाधि मिली थी।

त्रिमूर्ति ने की थी पूर्ण स्वतंत्रता की मांग

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे लाला लाजपत राय ने पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना की थी। लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल ने सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की थी और फिर बाद में समूचा देश इनके साथ हो गया। 

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ब्रिटिश हुकूमत का प्रमुखता से विरोध करने की वजह से लाला लाजपत राय को वर्मा की जेल में भी कुछ वक्त तक रहना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने साल 1917 में अमेरिका जाने का निर्णय लिया और वहां पर उन्होंने इंडियन होम रूल लीग ऑफ अमेरिका नामक एक संगठन स्थापित किया। जिसका उद्देश्य भारत के बाहर भारत के लिए काम करने का था और फिर साल 1920 में पंजाब केसरी वतन लौट आए और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन का हिस्सा बने।

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