लक्षद्वीप के सियासी तूफान की क्या वजह है, कौन हैं प्रफुल पटेल जिन्हें वापस बुलाने का प्रस्ताव केरल विधानसभा में हुआ पास

By अभिनय आकाश | May 31, 2021

केरल के कोच्चि से दूर चहुंओर अरबसागर से घिरे और महज 32 वर्ग किलोमीटर दायरे में कायम 36 द्वीपों के समूह लक्षद्वीप नीले समंदर, सुनहले बलुअई किनारों, प्रवाल-द्वीपों, समुद्री शैलभित्तियो, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के ना-मालूम कितनी प्रजातियों से भरे लक्षद्वीप में बस 10 ही द्वीप हैं, जहां जन-जीवन आबाद है।आमतौर पर खबरों से दूर रहने वाला लक्षद्वीप आजकल सुर्खियों में है। केरल के निवासियों का मानना है कि लक्षद्वीप खतरे में है और केंद्र सरकार को तत्काल कुछ कदम उठाने चाहिए। सोशल मीडिया पर #SaveLakshadweep और #Lakshadweep नाम से कैंपेन चलाकर लक्षद्वीप प्रशासक को वापस भेजे जाने की मांग की जा रही है। इस समय प्रफुल खोड़ाभाई पटेल लक्षद्वीप के प्रशासक हैं और उनके कुछ फैसलों से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। लोगों का मानना है कि इस फैसलों से स्थानीय लोगों में भारी में भारी गुस्सा है। लोगों का मानना है कि इन फैसलों से उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचेगा। दरअसल, इस द्वीप के नये प्रशासक कई सुधार करना चाहते हैं। जिससे लक्षद्वीप का कायाकल्प सुनिश्चित हो। लेकिन इस अभियान के विरोध में कई लोग उतर आए है। विशेषकर केरल के निवासी जो अब लक्षद्वीप बचाओ अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि लक्षद्वीप से जुड़ा विवाद क्या है? 

लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित भारत की सबसे छोटा द्वीपसमूह है। यहां की आबादी 60 से 65 हजार की है। यहां कोई सीएम नहीं है और न कोई असेंबली। इसे प्रशासिक अधिकारी द्वारा ही चलाया जाता है। यह क्षेत्र सामाजिक और सांस्सृतिक तौर पर केरल के नजदीक है। रणनीतिक तौर पर यह भारत के लिए बेहद अहम इलाका है। दिसंबर 2020 तक ये प्रशासक कोई आईएएस या आईपीएस ही हुआ करता था। आखिरी प्रशासक का नाम दिनेश्वर शर्मा रहे जिनका दिसंबर 2020 में देहांत हुआ था। जिसके बाद ये चार्ज प्रफुल पटेल को दिया गया। 

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कौन हैं प्रफुल पटेल

गुजरात की राजनीति में नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद सहयोगियों की फेहरिस्त में प्रफुल पटेल का नाम भी शामिल रहा है, जो इन दिनों केंद्र शासित लक्षद्वीप में बतौर प्रशासक अपने कुछ फैसलों को लेकर सुर्खियों में हैं। 2007 में प्रफुल पटेल पहली बार गुजरात के विधायक बने। उस वक्त नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में अमित शाह गुजरात के गृह मंत्री थे। 2010 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में अमित शाह की गिरफ्तारी के बाद प्रफुल पटेल को केवल गृह मंत्रालय ही नहीं बल्कि अमित शाह के पास रहे 10 में से आठ मंत्रालय का जिम्मा दिया गया। प्रफुल पटेल के पिता का संघ से पुराना नाता रहा है। 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रफुल पटेल के हिस्से हार आती है। 2014 में नरेंद्र मोदी गुजरात से केंद्र में आए तो पटेल भी गुजरात की राजनीति से बाहर आए। 2016 में पटेल को दमन-दीव और दादरा और नगर हवेली का प्रशासक बनाया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दादरा और नगर हवेली के प्रशासक के तौर पर वहां के कलेक्टर को आदेशित करने के आरोप में चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी किया था। फरवरी 2021 में दादरा और नगर हवेली के निर्दलीय सांसद मोहन डेलकर ने मुंबई के एक होटल में आत्महत्या कर ली थी। उनके 15 पन्नों के सुसाइड नोट में कथित तौर पर पटेल को उनकी मौत के लिए जिम्मेदार बताया गया था। मोहन डेलकर सात बार सांसद रह चुके थे। डेलकर के बेटे ने महाराष्ट्र पुलि को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि पटेल ने उनके पिता से 25 करड़ रुपये मांगे थे या असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत झूठा मुकदमा लगाने की बात कही थी। 

लक्षद्वीप विवाद क्या है? 

प्रफुल पटेल द्वारा कई मसौदें पेश किए गए हैं, जो विवाद में हैं और लोगों में इसको लेकर गहरी नाराजगी भी है। केंद्र के खिलाफ विपक्षी दलों ने भी हल्ला बोला है। आइए विवाद के केंद्र में रहे मसौदों पर सिलसिलेवार ढंग से नजर डालते हैं। 

पहला- लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन का मसौदा (एलडीएआर)- इसे जनवरी 2021 में पेश किया गया। ये मसौदा प्रशासक को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से जुड़े काम के लिए स्थानीय रहवासियों को उनकी जगह या जमीन से हटाने या कहीं और विस्थापित करने की ताकत देता है। इसके तहत किसी भी तरह की अचल संपत्ति विकास कार्य के लिए दी जा सकती है।

दूसरा- असामाजिक गतिविधियों की रोथाम अधिनियम (पीएएसए)- जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को सरकार एक साल के लिए हिरासत में ले सकती है बिना कोई सार्वजनिक जानकारी जारी किए। 

तीसरा- पंचायत अधिसूचना- जिसके मुताबिक किसी भी दो से अधिक बच्चों वाले पंचायत सदस्य को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। ना ही किसी ऐसे व्यक्ति को चुनाव लड़ने की इजाजत होगी। 

चौथा- लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन 2021-इस मसौदे को 25 फरवरी को जनता की प्रतिक्रिया लेने के लिए जारी किया गया। इस मसौदे के मुताबिक किसी भी जानवर को मारना बहुत मुश्किल हो सकता है। किसी भी पशु को मारने से पहले उसका फिटनेस सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा। इसी मसौदे की धारा 5(2) के अनुसार यदि पशु या गाय का बछड़ा, बैल है तो फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दी जाएगी। इसी मसौदे की धारा 8 में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बीफ या बीफ से बनी चीजों को किसी भी रूप में बेचने, रखने, स्टोर करने या कहीं ले जाने की इजाज़त नहीं है। गाय की हत्या पर कम से कम 10 साल की जेल और उम्र कैद तक की सजा और 5 लाख रुपये का जुर्माना। इसके अलावा प्रशासन ने एक ऐसा फैसला भी लिया है, जिसमें शराब की बिक्री को बढ़ाने की नीति बनाई गई है। 

97 फीसदी मुस्लिम आबादी

लक्षद्वीप को लंबे समय से गैर मादक इलाके के रूप में जाना जाता है। यहां रहने वाली कुल जनसंख्या के 97 फीसदी लोग मुस्लिम हैं जो कि मांसाहार का सेवन करते हैं। वहीं पीएम मोदी के करीबी रहे प्रफुल्ल पर ये आरोप है कि वह बीजेपी के बीफ बैन वाले एजेंडे को लक्षद्वीप में लागू कराने को सारी नीतियां बना रहे हैं। इसके विरोध में स्थानीय स्तर पर तमाम लोगों का प्रदर्शन भी हो रहा है। लक्षद्वीप में तीन लोगों को इन प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया है। इनमें से 2 प्रदर्शनकारी स्टूडेंट हैं, जिन पर प्रशासक को आपत्तिजनक मेसेज करने का आरोप है।

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मालदीव की तरह विकास

अपने सुधार संबंधी कदमों को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं से घिरे लक्षद्वीप प्रशासन ने कहा कि वह द्वीपसमूह के भविष्य के लिहाज से योजनाबद्ध तरीके से बुनियाद रख रहा है और दो दशक में इसे मालदीव की तर्ज पर विकसित करना चाहता है। इस तरह के कदमों को लक्षद्वीप की जनता को विश्वास में लिये बिना उठाने के आरोपों को खारिज करते हुए जिलाधिकारी एस असकर अली ने कहा कि निहित स्वार्थ वाले और अवैध कारोबार में संलिप्त लोग प्रशासन के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम (पासा) लागू करने के फैसले को उचित ठहराते हुए अधिकारी ने कहा कि ऐसा मादक पदार्थ तस्करी और बच्चों के साथ बढ़ते यौन उत्पीड़न के मामलों को रोकने के लिए किया गया है। हम समग्र रूप से इस जगह को विकसित करने की योजना बना रहे हैं तो हम कानून व्यवस्था के मोर्चों पर समझौता नहीं कर सकते।

केरल विधानसभा में प्रस्ताव पास

केरल विधानसभा ने लक्षद्वीप के लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया, जिसमें द्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल को वापस बुलाए जाने की मांग की गई है आौर केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है, ताकि द्वीप के लोगों के जीवन और उनकी आजीविका की रक्षा हो सके। इसी के साथ केरल देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने केंद्रशासित प्रदेश में हुए हालिया घटनाक्रमों को लेकर लोगों का समर्थन करते हुए प्रस्ताव पारित किया है।  केरल के मुख्मयंत्री पिनराई विजयन ने सरकारी प्रस्ताव पेश किया, जो 15वीं विधानसभा में इस प्रकार पहला प्रस्ताव है। उन्होंने केरल और लक्षद्वीप के लोगों के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को याद किया और वहां स्वाभाविक लोकतंत्र को नष्ट करने की कथित कोशिश के लिए केंद्र की निंदा की। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप का भविष्य चिंता का विषय है और इसकी अनूठी एवं स्थानीय जीवनशैली को कमजोर करना अस्वीकार्य है। मुख्यमंत्री ने अपील की कि संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखने का समर्थन करने वालों को लक्षद्वीप के प्रशासक के कदमों का कड़ा विरोध करना चाहिए। अपने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए, सत्तारूढ़ माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव का समर्थन किया। 

बीजेपी के अंदर भी विरोध तेज

लक्षद्वीप समूह के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ विरोध के सुर तेज होते जा रहे हैं। बीजेपी के अंदर से भी आवाजें उठने लगी हैं। राष्ट्रपति और गृहमंत्री से शिकायत के बाद पार्टी की युवा मोर्चा के 8 सदस्य पिछले 2 दिनों में इस्तीफा दे चुके हैं। तानाशाही प्रशासन का आरोप लगाते हुए और भी पदाधिकारी इस्तीफा दे सकते हैं।-अभिनय आकाश 


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