By अंकित सिंह | Mar 04, 2026
एक भाषा, तीन लिपि नीति की आड़ में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बुधवार को एक बार फिर केंद्र सरकार पर राज्य में हिंदी थोपने का आरोप लगाया। स्टालिन ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार "उच्चारण में मुश्किल" हिंदी नामों को अंग्रेजी और तमिल लिपियों में हूबहू लिप्यंतरित कर रही है और भाजपा को हिंदी थोपने के इस जुनून के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा कि भाजपा सरकार द्वारा हिंदी थोपना: प्रवेश द्वार पर ही उच्चारण में मुश्किल नाम! भाजपा हिंदी थोपने के अपने जुनून में सारी हदें पार कर रही है! केंद्र भाजपा सरकार ने "एक भाषा, तीन लिपि" नीति अपनाकर हिंदी थोपने का घिनौना काम किया है, जहां हिंदी नामों को सीधे तमिल और अंग्रेजी लिपियों में लिप्यंतरित किया जा रहा है!
स्टालिन ने हिंदी थोपने के कथित उदाहरणों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि तिरुचिरापल्ली रेलवे मंडल कार्यालय में भाजपा ने 'कर्तव्य द्वार' को तीन लिपियों में लिखा है। उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफओ) कार्यालयों के लिए भविष्य निधि भवन नाम के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि नए आपराधिक कानूनों के लिए भी वे संस्कृत नामों को अंग्रेजी लिपि में लिखते हैं। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय का नाम 'जल शक्ति' कर दिया गया है। महात्मा गांधी 100-दिवसीय कार्य योजना (एमजीएनआरईजीए) के नाम में बदलाव के मामले में भी उन्होंने यही रवैया अपनाया।
स्टालिन ने कहा कि भाजपा को करारा सबक सिखाया जाना चाहिए और उनसे हिंदी थोपने के प्रयास को छोड़ने को कहा। उन्होंने कहा कि उनकी धृष्टता और अहंकार बढ़ता जा रहा है। तमिल जनता के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वालों को करारा सबक सिखाया जाना चाहिए! उन्हें तमिल और अंग्रेजी लिपियों के माध्यम से हिंदी थोपने का प्रयास छोड़ देना चाहिए और तुरंत उचित तमिल नाम वहां अंकित किए जाने चाहिए। मैं चेतावनी देता हूं कि अन्यथा, केंद्र सरकार की भाजपा सरकार को तमिलों के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा।