By अनन्या मिश्रा | Apr 08, 2026
पूरे देश में एकमात्र केरल ऐसा राज्य है, जहां पर वामपंथी दल सत्ता में है। साल 2021 में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने सत्ता में वापकी करके सभी को चौंका दिया था। हालांकि यह चुनाव परिणाम राज्य के पैटर्न से बिल्कुल भी अलग था। 5 साल पहले यह जीत वामपंथ से अधिक पिनाराई ब्रांड की सफलता मानी गई थी। ऐसे में एक बार से साल 2026 के केरल विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन से चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं। अगर राज्य में वाम मोर्चा यानी की LDF तीसरी बार सत्ता में वापसी करती है, तो इतिहास बन जाएगा।
केरल के चुनावी इतिहास हमेशा सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है। वहीं साल 2021 में विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ ने इस चक्र को तोड़ दिया है। इस दौरान साल पार्टी ने 140 में से 99 सीटें जीतकर सभी को हैरान कर दिया था। लेकिन तब इसको राजनीतिक संयोग माना गया था। लेकिन साल 2026 के चुनाव करीब आते ही LDF के हैट्रिक की चर्चाएं फिर से शुरू हो गई हैं।
साल 1980 के आसपास एलडीएफ का गठन हुआ था। जब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में वामपंथी दलों ने एकजुट होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। फिर साल 1980 के चुनाव में ई के नयनार के नेतृत्व में पहली बार एलडीएफ की सरकार बनी थी।
ई के नयनार, वी एस अच्युतानंदन और वर्तमान सीएम पिनराई विजयन ने एलडीएफ सरकारों का नेतृत्व किया है। वहीं साल 2021 के विधानसभा चुनावों में पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ ने भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। यह 40 से अधिक सालों में पहली बार था, जब राज्य में किसी मौजूदा सरकार को जनता ने दोबारा मौका दिया था।