By अभिनय आकाश | Sep 09, 2026
साउथ कोरिया की राजधानी सोल में दुनिया के कई देशों के रक्षाधिकारियों का बड़ा मंच लगा था। चर्चा हो रही थी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री चुनौतियों की। फिलीपींस के डिफेंस सेक्रेटरी गिलबर्टो टोडेरो भी मंच पर मौजूद थे और अपने देश के सामने मौजूद समुद्री खतरों की बात कर रहे थे। तभी ऑडियंस की तरफ से चीन की स्थिति वाला एक नोट उन्हें दिया गया। नोट में लिखा था कि 2016 में साउथ चाइना सी को लेकर आया अंतरराष्ट्रीय फैसला गैरकानूनी है। चीन उसे नहीं मानता और उसकी कोई बाधिकारी ताकत नहीं है। गिलबर्टों ने पर्ची पढ़ी और फिर चीन को उसी के शब्दों में ऐसा जवाब दिया कि यह पूरा मामला सुर्खियों में आ गया। मतलब इस तरह चीन को कभी बेइज्जत होते नहीं देखा गया। फिलीपींस के डिफेंस सेक्रेटरी ने चीन की तरफ से आए एक छोटे से कागज को ही चीन के खिलाफ हथियार बना दिया। लेकिन जो कुछ कहा गया उसमें कई ऐसी बातें हैं जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। इसके पीछे करीब एक दशक पुराना एक बड़ा समुद्री विवाद है। एक ऐसा विवाद जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्र में अधिकार, चीन की दावेदारी और फिलीपींस की सुरक्षा सब कुछ एक साथ जुड़ा हुआ है।
पहले तो उन्होंने चीन का नोट पढ़ा। फिर कहा कि अगर आप यह कह रहे हैं कि ऑर्बिट्रेशन अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है, तो फिर आपने जिस उन्ज़ पर दस्तखत किए, तो क्या आप यह कहना चाहते हैं कि उन्को ही अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है। यानी चीन की दलील को उसी के सामने पलट दिया गया। इसके बाद नोट में कहा गया कि 2016 के फैसले की कोई बाधिकारी ताकत नहीं है। गिलबर्टो ने जवाब दिया क्योंकि आप यूएन क्लॉज़ के अधीन होना नहीं चाहते और क्योंकि नोट में चीन की तरफ से इस फैसले को स्वीकार नहीं किया गया ना उसे मान्यता दी गई।