Anand Bakshi Death Anniversary: बंदूक छोड़ थामी कलम, Army का जवान ऐसे बना Bollywood का Legend

By अनन्या मिश्रा | Mar 30, 2026

अपने सदाबहार गीतों से लोगों को अपना दीवाना बनाने वाले बॉलीवुड के फेमस गीतकार आनंद बख्शी का 30 मार्च को निधन हो गया था। उन्होंने करीब चार दशकों तक सभी के दिलों पर राज किया था। फिल्म गीतकार आनंद बख्शी का साल 2002 में 72 साल की उम्र में निधन हो गया था। शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसने गीतकार आनंद बख्शी के लिखे मैजिकल गानों को नहीं सुना होगा। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर आनंद बख्शी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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फिल्मी सफर

तीन साल तक सेना में नौकरी करने के बाद आनंद बख्शी ने तय किया कि उनकी जिंदगी का मकसद बंदूक चलाना नहीं बल्कि गीत लिखना है। अपने फिल्मी करियर में आनंद बख्शी ने करीब 4000 से ज्यादा गीत लिखे थे। उनका साल 1957 में पहली बार गीत लिखने का मौका मिला। लेकिन सफलता उनसे दामन चुराती रही। साल 1963 में निर्देशक और अभिनेता राज कपूर ने आनंद बख्शी को अपनी फिल्म में गीत लिखने का मौका दिया। इसके बाद सफलता ने कभी आनंद बख्शी का साथ नहीं छोड़ा।

उनके करियर का शुरूआती माइलस्टोन बनी 'आराधना', 'कटी पतंग' और 'अमर प्रेम' जैसी फिल्में बनीं। इन्हीं फिल्मों की बदौलत अभिनेता राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने थे। आनंद ने फिल्मकारों की कई पीढ़ियों के साथ काम किया था। आनंद बख्शी की सबसे बड़ी खासियत थी कि समय के साथ उनके गीतों का लहजा बदलता रहा था।

गीत

साल 1965 में 'जब जब फूल खिले' फिल्म आई, तो इसके गाने 'समां... समां है ये प्यार का', 'एक था गुल और एक थी बुलबुल' और 'परदेसियों से न अंखियां मिलाना' सुपरहिट साबित हुए। वहीं आनंद बख्शी की गीतकार के रूप में पहचान भी बन गई।

मृत्यु

वहीं 30 मार्च 2002 को 71 साल की उम्र में गीतकार आनंद बख्शी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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