अंगदान कानून को सांप्रदायिक सौहार्द के लिए पथप्रदर्शक बनने दें : केरल उच्च न्यायालय

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 01, 2021

कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने कहा है कि 1994 के मानव अंग एवं उत्तक प्रतिरोपण अधिनियम को सांप्रदायिक सौहार्द एवं धर्मनिरपेक्षता का पथप्रदर्शक बनने दें ताकि विभिन्न धर्मों एवं आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग अलग जातियों, नस्ल, धर्म या पूर्व में अपराधी रहे जरूरतमंद लोगों को अंगदान कर सकें। अदालत ने कहा, ‘‘मानव शरीर में अपराधी गुर्दा या अपराधी यकृत या अपराधी हृदय जैसा कोई अंग नहीं होता। किसी गैर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के अंग और ऐसे व्यक्ति जिसका कोई आपराधिक इतिहास रहा है, उसके अंग में कोई अंतर नहीं होता है। हम सभी की रगों में इंसानी खून दौड़ रहा है।’’

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न्यायमूर्ति ने कहा कि अगर समिति के इस रुख को अनुमति दी जाती है तो ‘‘मुझे अंदेशा है कि भविष्य में प्रतिवादी (समिति) अंगदान की अनुमति के लिए इस तरह के आवेदनों को इस आधार पर अस्वीकार कर देगा कि दाता एक हत्यारा, चोर, बलात्कारी, या मामूली आपराधिक अपराधों में शामिल है। मुझे आशा है कि वे दाता के हिंदू, ईसाई, मुस्लिम, सिख धर्म या निचली जाति का व्यक्ति होने के आधार पर आवेदनों को खारिज नहीं करेंगे।

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