ज़िंदगी और छुट्टियां (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Feb 23, 2026

एआई से जो मर्ज़ी पूछ लीजिए, तनमन चाही जगहों पर अपनी तस्वीरें बनवा लीजिए लेकिन घुमक्कड़ी का लुत्फ़ उठाने के लिए वहां सशरीर ही जाना पडेगा। उससे पहले माल चाहिए और छुट्टी भी। एक बार मिली ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा छुट्टियां सरकारी नौकरी में ही हो सकती हैं। पति या पत्नी सरकारी नौकरी में हों तो किस्मत और जुगाड़ दोनों जेब में रह सकते हैं। पोस्टिंग का प्रबंधन भी हो जाता है। सरकारी नौकरी की तो वाह वाह है जी। आम समाज में उन लोगों की सामाजिक रेटिंग कम रहती है जिनके परिवार से एक भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं होता। सरकारजी के वश में हो तो सभी को सरकारी नौकरी दे दे और अपने वोट पक्के कर ले।  

इसे भी पढ़ें: प्रशासनजी का हरकत में आना (व्यंग्य)

आम तौर पर साल के दौरान होने वाली छुट्टियां, ज़िंदगी में बहार की तरह आती हैं लेकिन रविवार को घोषित छुट्टियां पतझड़ सी उदासी लाती हैं। अगर यही अवकाश दूसरे वार को हों तो मौसम सुहाना रहता है। कई बार वैकल्पिक अवकाश भी रविवार को आते रहे हैं जो अनचाही तेज़ बारिश वाले दिन की तरह होते हैं । कई त्योहारों या प्रसिद्ध जन्मदिन का अवकाश, शनिवार या सोमवार को रहता है तो स्थानीय मेला सा लगता है। अगर कोई छुट्टी दूसरे शनिवार को घोषित हो जाए तो इस बात की भी तारीफ़ नहीं की जाती क्योंकि उस दिन पहले ही अवकाश होता है।   

इस साल भी राष्ट्रीय अवकाश सिर्फ तीन हैं, धार्मिक और सांस्कृतिक छुट्टियां उन्नीस होनी हैं। एक राज्य में, बावन वीकेंड यानी शनिवार रविवार मिलाकर, एक सौ सत्ताईस अवकाश हैं। दूसरे राज्य में तीन अवकाश ज्यादा हैं। इसके इलावा तीन ऐच्छिक, तेरह आकस्मिक, पंद्रह मेडिकल, तीस अर्जित यानी साल में छ महीने की शानदार छुट्टी। इतनी छुट्टियां हैं कि हर दूसरे दिन दफ्तर जाने की सुविधा  है। किसी आम व्यक्ति ने काम से जाना हो तो उसे पहले पता कर लेना चाहिए, फलां कर्मचारीजी आज अवकाश पर तो नहीं। 

दो तीन सप्ताह के बाद, तीन दिन का सप्ताहांत भी उपलब्ध है। कुछ छुट्टियां शुक्रवार या शनिवार को भी होती हैं जिनके साथ एक छुट्टी लेकर कई छुट्टियां एक साथ हो सकती हैं। एक छुट्टी ले लेने से चार दिन की छुट्टी हो जाती है और दो लेने से पांच या छ दिन का थका देने वाला आराम। 

काफी ज़्यादा समझदार लोगों का सुझाव है कि यदि कोई त्योहार या अवकाश दूसरे शनिवार या रविवार को आ रहा हो, उसकी सरकारी छुट्टी किसी अन्य वार को कर देनी चाहिए, जिस वार को पहले से छुट्टी न हो। सरकार अपने सभी काम समझदारी से करती है, सुबह से शाम तक खूब काम करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाली छुट्टियां ही उचित तरीके से नहीं करती।   

कुछ छुट्टियों का दिन बदल दे तो वोट बैंक ही बढेगा। इस तरह सरकारी राजनीतिक पार्टी, काफी वोटें, आने वाले चुनाव के लिए अपने पक्ष में सुनिश्चित कर सकती है। छुट्टियों का खालिस मज़ा लेने के लिए सरकारी नौकरी में प्रवेश करने की कोशिश करते रहना बहुत ज़रूरी है।     

- संतोष उत्सुक

प्रमुख खबरें

Festival Capital of the World लुइसियाना में Jazz Fest और Food Culture का लें अनोखा आनंद

Bank Strike से पहले RBI का बड़ा कदम, 27 सितंबर रविवार को खुलेंगी सभी शाखाएं

AI के खतरों की आशंकाएं बढ़ा-चढ़ाकर बताई गईं, Global Ban संभव नहीं: Sridhar Vembu

विचारों का मतभेद सामान्य बात...SIR पर खुलासे पर चुनाव आयोग की सफाई 10 प्वाइंट में समझें