'फेल होने से जिंदगी अटक नहीं जाती', PM मोदी ने छात्रों को दिए टेंशन छूमंतर करने के टिप्स

By अंकित सिंह | Feb 10, 2025

परीक्षा पे चर्चा 2025 के आठवें संस्करण में, पीएम मोदी छात्रों के परीक्षा तनाव संबंधी प्रश्नों को संबोधित किया। इस वर्ष की परीक्षा पे चर्चा में एपिसोड की आठ श्रृंखलाएं होंगी, जिसमें प्रमुख हस्तियां जीवन और सीखने से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपनी विशेषज्ञता साझा करेंगी। कार्यक्रम में राज्य/केंद्रशासित प्रदेश बोर्ड के सरकारी स्कूलों, केंद्रीय विद्यालयों, सैनिक स्कूलों और अन्य सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के 36 छात्रों की भागीदारी भी शामिल है।

मोदी ने कहा कि आप, सम्मान मांग नहीं सकते, आपको सम्मान कमाना पड़ेगा। इसके लिए आपको खुद को बदलना होगा। नेतृत्व  थोपी नहीं जाती, आपके आस-पास के लोग आपको स्वीकारते हैं। नेता बनने के लिए टीम वर्क सीखना बहुत जरूरी है, धैर्य बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हम रोबोट की तरह जी नहीं सकते, हम इंसान हैं। आखिरकार हम पढ़ाई क्यों करते हैं... आगे जाने के लिए। हम, हर स्तर पर अपने सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई करते हैं।

शिक्षक, अभिभावक से मोदी ने कहा कि बच्चों को आप दीवारों में बंद करके एक प्रकार से किताबों का जेलखाना बना दें, तो बच्चे ग्रो नहीं कर सकते हैं। बच्चों को खुला आसमान चाहिए, उनको अपनी पसंद की चीजें चाहिए। अगर वो अपनी पसंद की चीजें अच्छे से करता है, तो पढ़ाई भी अच्छे से करेगा। जिदंगी में परीक्षा ही सब कुछ है, इस प्रकार के भाव से नहीं जीना चाहिए। सबसे अमूल्य टिप है-  Live in the Moment. अगर वो पल चला गया तो Past हो जाएगा, लेकिन अगर उस पल को हमने जी लिया, तो वो जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो मेरा, मां-बाप और परिवारजनों से आग्रह है कि आप अपनी संतानों को समझने और जानने का प्रयास कीजिए। उनकी इच्छाओं व क्षमताओं को समझिए। उसकी क्षमता के हिसाब से उसे Monitor कीजिए और हो सके तो उसकी मदद ​कीजिए। मोदी ने कहा कि शिक्षकों से भी मेरा आग्रह ​है कि आप, एक विद्यार्थी की दूसरे विद्यार्थी से तुलना मत कीजिए। किसी विद्यार्थी को और विद्यार्थियों के बीच टोका मत कीजिए। अगर कुछ कहना है, तो उसे अलग से कहिए।

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छात्रों से पीएम ने कहा कि फेल होने से जिंदगी अटक नहीं जाती है। आपको तय करना होगा कि जीवन में सफल होना है कि किताबों से सफल होना है। जीवन में सफल होने का एक उपाय ये होता है कि अपने जीवन की विफलताओं को अपना टीचर बना लें। जीवन सिर्फ प​रीक्षाएं नहीं हैं, जीवन समग्रता में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ परीक्षा ही नहीं बल्कि जीवन में भी सफल हों। इसके लिए अपनी असफलताओं को सबक में बदलें। क्रिकेटर अपनी गलतियों का एहसास करने के लिए मैच देखते हैं। अपनी असफलताओं को अपना शिक्षक बनाएं। जीवन में सफल होने के लिए अपनी शक्तियों को देखें और उन पर काम करें।

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