By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 05, 2021
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “11 महीने (किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया), 700 से अधिक किसान मारे गए। केंद्र को तीन कृषि बिलों को रद्द करना पड़ा जब किसानों ने बलिदान दिया। हमें अपने अधिकार वापस पाने के लिए वैसा बलिदान भी करना पड़ सकता है।” अब्दुल्ला ने कहा, “यह याद रखें, हमने (अनुच्छेद) 370, 35-ए और राज्य का दर्जा वापस पाने का वादा किया है और हम कोई भी बलिदान देने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि नेकां हालांकि भाईचारे के खिलाफ नहीं है और हिंसा का समर्थन नहीं करती है। केंद्र ने तत्कालीन जम्मू कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को रद्द कर दिया था और पांच अगस्त, 2019 को इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। हाल ही में हैदरपोरा मुठभेड़ और अभियान में मारे गए दो नागरिकों के परिवारों ने प्रशासन को उनके शव वापस करने के लिए कैसे मजबूर किया, इस पर अब्दुल्ला ने कहा कि यह संभव हुआ क्योंकि लोगों ने एकता दिखाई। उन्होंने मांग की कि मुठभेड़ में मारे गए एक अन्य व्यक्ति आमिर मागरे का शव भी उसके परिजनों को लौटाया जाए।