लोकसभा ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख संबंधी अनुदान की मांगों को मंजूरी दी, वित्त मंत्री ने विकास के लिये महत्वपूर्ण बताया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 18, 2020

नयी दिल्ली। लोकसभा ने बुधवार को वर्ष 2019-20 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच तथा जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के लिये 2019-20 तथा 2020-21 के लिये अनुदानों की मांगों तथा संबंधित विनियोग विधेयकों को मंजूरी दे दी। निचले सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधान समाप्त होने के बाद से भ्रष्टाचार समाप्त हुआ है और चीजें पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ रही हैं एवं विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब सरकार में थी तब उसने कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिये प्रयास नहीं किये। वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ सदस्य पूछ रहे हैं कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने के बाद क्या बदला है? उन्होंने कहा, ‘‘ हम बताना चाहते हैं कि अब भ्रष्टाचार नहीं है, पारदर्शिता आई है, पारदर्शी ढंग से निविदाएं हो रही हैं, सही अर्थो में लोकतंत्र आगे बढ़ रहा है।’’ उन्होंने कहा कि इसका प्रमाण है कि जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव हुए, ब्लाक विकास परिषद के चुनाव हुए और आज लोग अधिकारियों एवं प्रशासन से सीधे सम्पर्क कर रहे हैं जो पहले संभव नहीं हो रहा था। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने वर्ष 2019-20 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच और जम्मू कश्मीर और लद्दाख से संबंधित अनुदान की मांगों एवं संबंधित विनियोग विधेयकों को मंजूरी दे दी। सीतारमण ने कहा कि आज जो लोग जम्मू कश्मीर में मानवाधिकार की बात कर रहे हैं, वह उनसे पूछना चाहेंगी कि उस समय वे कहां थे जब प्रदेश में मानवाधिकार आयोग नहीं था, महिलाओं के अधिकारों की आवाज उठाने वाला कोई नहीं था, अनुसूचित जाति-जनजाति के हक की बात करने वाला कोई नहीं था। उन्होंने सवाल किया कि क्या मानवाधिकार की बातें हमसे (भाजपा) पूछी जायेंगी, क्या यह कांग्रेस पर लागू नहीं होता है। वित्त मंत्री ने कहा कि 1990 के दशक की शुरूआत में जम्मू कश्मीर ने नरसंहार का दौर देखा और कश्मीरी पंडितों को बाहर जाना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘क्या कश्मीरी पंडितों का मानवाधिकार नहीं है।’’ इस पर कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि तब वीपी सिंह की सरकार थी जिसे भाजपा समर्थन दे रही थी। इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि हमने वी पी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, फिर चंद्रशेखर की सरकार आई और फिर नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार आई लेकिन कश्मीरी पंडितों के लिये कुछ नहीं किया गया क्योंकि मंशा नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है कि जम्मू कश्मीर की अनुदान मांगों को लेकर संसद में चर्चा हो रही है, 1991, 1992, 1993, 1994 और 1995 में भी जम्मू कश्मीर के अनुदानों की मांगों एवं विनियोग विधेयक पर संसद में चर्चा हुई थी। 

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