Bal Gangadhar Tilak Death Anniversary: लोकमान्य तिलक ने उठाई थी पूर्ण स्वराज की मांग, क्रांति की ज्वाला से दहल उठा था ब्रिटिश राज

By अनन्या मिश्रा | Aug 01, 2025

भारत के प्रमुख नेता, समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और लोकप्रिय नेता बाल गंगाधर तिलक का 01 अगस्त को निधन हो गया था। उनके नाम के आगे 'लोकमान्य' लगाया जाता है, जोकि उन्होंने अर्जित की थी। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान सबसे पहले पूर्ण स्वराज की मांग उठाई थी। 'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है' का नारा बाल गंगाधर तिलक ने दिया था। उनका पूरा जीवन ही आदर्श था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर बाल गंगाधर तिलक के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली के आलोचक थे तिलक

पढ़ाई पूरी करने के बाद बाल गंगाधर तिलक ने पुणे के एक निजी स्कूल में गणित और अंग्रेजी के शिक्षक बनकर पढ़ाने लगे। लेकिन अन्य शिक्षकों के मतभेद के बाद साल 1880 में तिलक ने पढ़ाना छोड़ दिया था। दरअसल, वह अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली के आलोचक थे। वह स्कूलों में ब्रिटिश छात्रों की तुलना में भारतीय छात्रों के साथ हो रहे दोगले व्यवहार का विरोध करते थे। उन्होंने समाज में फैली छुआछूत के खिलाफ भी आवाज उठाई थी।

समाज सेवा

बाल गंगाधर तिलक ने बंबई में अकाल और पुणे में प्लेग महामारी के दौरान कई सामाजिक कार्य किए। साल 1893 में उन्होंने महाराष्ट्र में सार्वजनिक रूप से गणेशोत्सव मनाने की शुरूआत की। इस दौरान गणेश चतुर्थी के दिन लोग घर में भगवान गणेश की मूर्ति को 10 दिन रखकर उत्सव मनाते थे। वहीं तिलक ने विचार किया कि क्यों न घरों से निकालकर सार्वजनिक स्थल पर गणेशोत्सव मनाया जाए, जिससे कि इस पर्व में हर जाति के लोग शिरकत कर सकें।

तिलक के प्रयास

बाद में तिलक ने दक्खन शिक्षा सोसायटी की स्थापना की थी। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में शिक्षा के स्तर को सुधारना था। वहीं उन्होंने मराठी भाषा में मराठा दर्पण और केसरी नाम से दो अखबार शुरू किए थे। जोकि उस दौर में काफी ज्यादा लोकप्रिय हुए थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बनकर अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया और भारतीयों के लिए पूर्ण स्वराज की मांग की। केसरी अखबार में छपने वाले लेखों के कारण तिलक ने कई बार जेल यात्रा भी की।

मृत्यु

वहीं 01 अगस्त 1920 में बाल गंगाधर तिलक का निधन हो गया।

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