Shani Pradosh Vrat का महासंयोग, महादेव-शनि की कृपा से बनेंगे सारे काम, नोट करें सही तिथि और सरल उपाय

By दिव्यांशी भदौरिया | Feb 04, 2026

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शंकर की कृपा पाने के लिए सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। यदि यह व्रत शनिवार के दिन पड़े, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस साल 2026 का पहला शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी को पड़ रहा है। जो जातक शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान हैं या जिनका जीवन में सफलता की राह में बाधाएं आ रही हैं। 

हिंदू पंचांग अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में बताया है कि सूर्यास्त के बाद शाम के समय में की गई शिव पूजा से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं। शुभ मुहूर्त की बात करें तो प्रदोष व्रत की पूजा शाम 6:10 बजे से शुरू की जा सकती है, जो रात 8:44 बजे तक रहेगी। इस प्रकार कुल 2 घंटे 34 मिनट का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। 

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

शनि प्रदोष व्रत वाले दिन भगवान शिव और कर्मफलदाता शनि देव दोनों की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव,शनि देव के गुरु हैं। इसी कारण से शनि प्रदोष के दिन महादेव की आराधना करने से शनि देव भी शांत और प्रसन्न होते हैं। ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि इस दिन व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।

सौभाग्य के लिए विशेष उपाय

यदि आप करियर में सफलता चाहते हैं या फिर रुके हुए काम को पूरा करना चाहते हैं, तो यह उपाय करें।

छाया दान: एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और उसे किसी जरूरतमंद को दान कर दें।

पीपल की पूजा: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

 शिव अभिषेक: आप शिवलिंग पर काला तिल मिलाकर कच्चा दूध अर्पित करें।

पूजा के दौरान रखें ये सावधानी

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। पूजा के समय मन को शांत रखें और  'ॐ नमः शिवाय' के साथ 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें। 

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