नजफगढ़ का ‘प्रिंस’: जिसने आईपीएल का सपना पूरा करने के लिए कांस्टेबल की परीक्षा छोड़ दी थी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 07, 2026

 कुछ साल पहले तक नजफगढ़ में रहने वाले रेलवे सुरक्षा बल के सहायक सब इंस्पेक्टर (एएसआई) राम निवास यादव अपने सबसे छोटे बेटे प्रिंस के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थे, जिसकी दिलचस्पी केवल टेनिस बॉल टूर्नामेंट में यॉर्कर गेंदबाजी करने में थी। लेकिन इस युवा क्रिकेटर को खुद पर भरोसा था और उसने अपने पिता से सीधे शब्दों में कह दिया, ‘‘आप मेरी चिंता करना छोड़ दो। मैं अपने से कुछ कर लूंगा।’’ अब बात करते हैं 2026 की। वह बेपरवाह दिखने वाला लड़का अपने वादे पर खरा उतर चुका है।

रामनिवास ने आखिर अपने बेटे की जिद मान ली क्योंकि उनके पास अपने बेटे का साथ देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘बेटे की ज़िद है और हमें पूरा करना था। एक एएसआई के वेतन में कितना ही गुज़ारा हो पाता है। लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने उसे अपनी इच्छा पूरी करने दी।’’ प्रिंस के शानदार प्रदर्शन के बाद अब नजफगढ़ के खेड़ा डाबर गांव से भी लोग उनके घर पर बधाई देने के लिए आने लगे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले हमारे इस इलाके को लोग इसलिए जानते थे क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति साहिबा (प्रतिभा पाटिल) चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक संस्थान का उद्घाटन करने (2012में) यहां आई थी। अब हमारा इलाका क्रिकेट के लिए फेमस हो गया है।’’ राम निवास के अनुसार प्रिंस के पहले और अब तक के एकमात्र कोच अमित वशिष्ठ और भारत के अंडर-19 विश्व कप विजेता तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने उनके खेल में निखार लाने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, “मैं अमित सर का जितना भी शुक्रिया अदा करूं, कम है। उन्होंने प्रिंस को टेनिस टूर्नामेंट खेलते हुए देखा और उसे नजफगढ़ स्थित अपनी अकादमी से जुड़ने के लिए कहा। प्रदीप जी (सांगवान) भी अमित सर के शिष्य थे और उन्होंने प्रिंस को फिटनेस में मदद की।’’ एक समय ऐसा भी था जब प्रिंस अपनी पीठ पर रेत की बोरी बांधकर धान के खेतों में दौड़ते थे ताकि उनके शरीर का ऊपरी हिस्सा मजबूत बन जाए।

रामनिवास ने कहा, ‘‘प्रदीप ने उसका बहुत मार्गदर्शन किया और अमित सर ने उसके खेल में सुधार किया। मैं डीपीएल (दिल्ली प्रीमियर लीग) और नयी दिल्ली टीम को कैसे भूल सकता हूं। अगर डीपीएल नहीं होता, तो मुझे नहीं लगता कि मेरे बेटे की प्रगति इतनी तेज़ होती। इसलिए मैं डीडीसीए और विजय दहिया सर का भी आभारी हूं।’’

प्रिंस के कोच वशिष्ठ ने कहा,‘‘वह यॉर्कर गेंदें फेंक सकता था और टेनिस बॉल को भी अच्छी गति से स्विंग करा सकता था। जब मैंने उसे देखा तो मैंने उसके दोस्तों से कहा कि वे उसे मुझसे मिलने के लिए कहें। वह पहले से ही 18 साल का था और उसके पास अपनी काबिलियत साबित करने के लिए बहुत कम समय था।’’ वशिष्ठ को लगता है कि प्रिंस की कड़ी मेहनत करने की क्षमता ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘वह कड़ी मेहनत करने से पीछे नहीं हटा। वह दिल्ली की भीषण गर्मी में भी दो घंटे गेंदबाजी कर सकता है। प्रदीप के साथ काम करने से उसकी फिटनेस में सुधार हुआ है। वह जहीर खान और भरत अरुण से भी टिप्स ले चुका है। अब उसकी सफलता की कोई सीमा नहीं है।

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